केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि कोविड रोधी टीकाकरण के लिए स्लॉट (समय) अब व्हाट्सएप के जरिए भी बुक कराया जा सकता है।

मांडविया ने ट्वीट किया, नागरिक सुविधा के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त किया गया है। अब आप अपने फोन से कुछ ही मिनटों में कोविड-19 टीकाकरण के लिए आसानी से स्लॉट बुक करा सकते हैं। इसके लिए आपको व्हाट्सएप पर ‘माई गोव व्हाट्सएप हेल्पडेस्क’ पर बुक स्लॉट भेजना होगा, ओटीपी को सत्यापित करना होगा एवं अन्य चरणों का अनुसरण करना होगा। आज ही फोन नंबर 9013151515 पर स्लॉट बुक कराएं।

इस बीच व्हाट्सएप ने मंगलवार को कहा कि वह अपने मंच के माध्यम से लोगों को निकटतम टीकाकरण केंद्र का पता लगाने व इसके लिए स्लॉट बुक करने की सुविधा देगा। माइगोव के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म कोविड संबंधी तकनीकी समाधान के रूप में अग्रणी रहा है, जिससे देश के लाखों लोगों को लाभ हुआ है। माइगोव कोरोना हेल्पडेस्क की शुरुआत मार्च 2020 में की गई थी।

ऐसे स्लॉट बुक करें

व्हाट्सएप के जरिये माईजीओवीइंडिया कोरोना हेल्पडेस्क को ‘बुक स्लॉट’ लिखकर भेजेंगे तो आपका वैक्सीनेशन स्लॉट बुक हो जाएगा। इसके लिए आपको मोबाइल नंबर 9013151515 पर व्हाट्सएप करना होगा।

इस बीच व्हाट्सएप ने मंगलवार को कहा कि वह अपने मंच के माध्यम से लोगों को निकटतम टीकाकरण केंद्र का पता लगाने व इसके लिए स्लॉट बुक करने की सुविधा देगा। माइगोव के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म कोविड संबंधी तकनीकी समाधान के रूप में अग्रणी रहा है, जिससे देश के लाखों लोगों को लाभ हुआ है। माइगोव कोरोना हेल्पडेस्क की शुरुआत मार्च 2020 में की गई थी।

ऐसे स्लॉट बुक करें

व्हाट्सएप के जरिये माईजीओवीइंडिया कोरोना हेल्पडेस्क को ‘बुक स्लॉट’ लिखकर भेजेंगे तो आपका वैक्सीनेशन स्लॉट बुक हो जाएगा। इसके लिए आपको मोबाइल नंबर 9013151515 पर व्हाट्सएप करना होगा।

अब तक 32 लाख प्रमाणपत्र डाउनलोड हुए

मालूम हो कि इस साल 5 अगस्त को माइगोव और व्हाट्सएप ने उपयोगकर्ताओं के लिए चैटबॉट से टीकाकरण प्रमाणपत्र डाउनलोड करने की व्यवस्था दी थी। अब तक, व्हाट्सएप के जरिये पूरे देश में 32 लाख से अधिक प्रमाणपत्र डाउनलोड किए जा चुके हैं। व्हाट्सएप ने कहा, व्हाट्सएप पर माइगोव कोरोना हेल्पडेस्क मार्च 2020 के बाद से महामारी के दौरान कोविड संबंधी जानकारी के सबसे प्रामाणिक स्रोतों में से एक के रूप में उभरा है। भारत में 4.1 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक-स्वास्थ्य संकट से लड़ने में एक अहम साधन के रूप में कार्य किया है।

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