रामपुर (क़रीब 38 हज़ार वोटों से )हार गई समाजवादी पार्टी (एक लाख दस हज़ार वोटों से आम चुनाव में सपा ने यह सीट आज़म खां के लिए जीती थी ) आज़मगढ़ भी बीजेपी जीती (दो लाख साठ हज़ार वोटों से सपा ने आम चुनाव में अखिलेश यादव को जिताया था)संगरूर में आम आदमी पार्टी हारी(आम आदमी पार्टी की पिछले आम चुनाव में एक लाख दस हज़ार वोटों से जीती गई इकलौती सीट, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दो बार इसे आमआदमीपार्टी के लिए जीता था )

संघर्ष भी कम नहीं: मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के रहने वाले दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। उनकी गिनती भोजपुरी इंडस्ट्री के टॉप एक्टर्स में होती है। एक्टिंग, सिंगिंग के साथ-साथ निरहुआ अब फिल्में-एलबम भी प्रोड्यूस करने लगे हैं। बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले निरहुआ के पास एक वक्त में साइकिल तक नहीं थी। उनके पिता कलकत्ता (अब कोलकाता) में नौकरी करते थे और महीने की आमदनी महज 3500 रुपये थी। इसी में पत्नी और 5 बच्चों ( 2 बेटे और तीन बेटियों) का पालन-पोषण करना पड़ता था।

झुग्गी में बीता बचपन, लेकिन हार नहीं मानी: एक इंटरव्यू में निरहुआ ने बताया था कि चूंकि परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी, इसलिए वे और उनके भाई भी पिता के साथ कोलकाता चले गए। बचपन लगभग यहीं बीता। वो वक्त ऐसा था कि उनके पास साइकिल तक नहीं थी। कई किलोमीटर पैदल ही जाया करते थे।

साल 1997 में निरहुआ अपने गांव लौटे और बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की। हालांकि उनका मन गीत-संगीत में रमा था। दरअसल, निरहुआ (Dinesh Lal Yadav Nirahua) के चचेरे भाई विजय लाल यादव मशहूर बिरहा गायक थे और अपने इलाके में उनका खासा रुतबा था। निरहुआ उनको अपना प्रेरणा-स्रोत मानते थे और एक दिन उन्हीं की तरह नाम कमाने का सपना पाले थे।

एक एलबम से बन गए रातों-रात स्टार: साल 2003 में निरहुआ का एक एलबम आया। इसका नाम था ‘निरहुआ सटल रहे’। इसे खूब पसंद किया गया और इसी के बूते वे रातों-रात स्टार बन गए।

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