जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ धाम में बादल फटने की घटना के बाद मुजफ्फरपुर के तीर्थयात्रियों के कई जत्थे फंस गए। वैसे, शुक्रवार की शाम तक सब कुछ सामान्य था। जिले के तीर्थयात्रियों ने दूरभाष पर बताया कि संध्या आरती खत्म होते ही पहाड़ के शिखर की ओर जोरदार धमाका हुआ। लगा जैसे कड़कड़ाती हुई बिजली गिरी। पवित्र गुफा के पास ही बादल फटा था। देखते ही देखते अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक तूफानी वेग से पानी उपर से नीचे आने लगी।

घटना के समय अमरनाथ गुफा के पास मौजूद सरैया (मुजफ्फरपुर) निवासी चश्मदीद पंकज कुमार ने बताया कि बादल फटने के कारण निकले पानी से ग्लेशियर से लेकर जो कुछ भी रास्ते में आया, सब बहने लगे। गुफा के पास स्थित लंगर से लेकर टेंट हाउस तक पानी की तेज धार में बह गए। आनन-फानन में मौके पर मौजूद सेना की टुकड़ी के साथ ही एनडीआरएफ, एसएसबी और सीआरपीएफ के जवान राहत और बचाव कार्य में लग गए। श्रद्धालुओं को समझा-बुझाकर नियंत्रित किया गया ताकि कोई भगदड़ की स्थिति उत्पन्न नहीं हो। मौके से घायलों को उठाकर बेस कैंप के पास अस्पताल में ले जाया गया।

अपनों की तलाश में सूचना केंद्र पर भीड़

हादसे के बाद लोग यात्रा मार्ग में जहां-तहां फंस गए। हालात की गंभीरता को देखते हुए पहाड़ के नीचे बालटांड़ स्थित बेस कैंप से लेकर अन्य जगहों पर सूचना केंद्र एक्टिव हो गया। घबराए लोग अपनों की तलाश में सूचना केंद्र पर पहुंच रहे थे। मुजफ्फरपुर के कांटी इलाके के निवासी रोहित रंजन ने बताया कि बालटांड़ स्थित टेंट सिटी के सूचना केंद्र से लगातार उदघोषणा हो रही थी कि लोग धैर्य बनाए रखें। यात्रा सुरक्षित ढंग से चल रहा है।

नीचे सुरक्षित जगह ढूंढ़ने लगे लोग

मौके पर मौजूद पुरुषोत्तम पिक्कू और संजय सिंह (दोनों सरैया निवासी) ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि यात्रा मार्ग में सीमित मोबाइल (पोस्ट पेड सर्विस) ही काम कर रहा था। मोबाइल का नेटवर्क नहीं होने के कारण लोगों के जरिए ही बादल फटने की जानकारी ऊपर से नीचे तक पहुंची। खबर सुनते ही यात्रा मार्ग में जो लोग जहां थे, वहीं सुरक्षित स्थान खोजने लगे। पवित्र गुफा के रास्ते में हर जगह सेना और पारा मिलिट्री के जवान हरकत में आ गए।

गुफा मार्ग में ली शरण

मुजफ्फपुर के 50 से अधिक लोगों के अलावा बेतिया के करीब दर्जनभर श्रद्धालु के साथ ही बिहार के 200 से अधिक लोग उस समय यात्रा मार्ग में विभिन्न जगहों पर थे। इनमें मुजफ्फरपुर ट्रेजरी के तीन कर्मचारी भी शामिल हैं। हादसे के बाद तीनों कर्मियों ने गुफा मार्ग में ही किसी सुरक्षित जगह पर शरण ली है।

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