लगातार हो रही बारिश के कारण सिकटी प्रखंड क्षेत्र से बहने वाली नूना नदी गुरुवार को फिर उफना गई। नूना इस साल दूसरी बार उफनाई है। नूना नदी के उफनाने से घोड़ा चौक, सिघिया बांसबाड़ी, सालगुड़ी, कचना आदि गांव टोले के निचले इलाके के दर्जनों घरों में पानी घुस गया है। सिकटी विलायती बाड़ी सड़क पर घोड़ा चौक के पास ढाई से तीन फीट पानी बह रहा है। तेज बहाव के साथ पानी बहने से आवागमन बंद हो गया है।

इन गांवों के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इससे लोगों के समक्ष एक नई समस्या खड़ी हो गई है। विगत वर्ष नूना में 16 बार आई बाढ़ के कारण काफी बर्बादी हुई थी। ग्रामीण फरमान अली, इश्तियाक, अहमद राजा, नाजीम आदि ने बताया कि बुधवार को लगभग तीन बजे के बाद नूना नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही थी। शाम से नूना नदी के जलस्तर में कमी आने लगी। गुरुवार को दोपहर बाद घोड़ा चौक, सिघिया, बांसवाड़ी व सालगुडी कचना गांव में घरों में पानी घुसना शुरू हो गया।

ग्रामीणों ने बताया कि नूना नदी काफी खतरनाक है। पिछली बार 16 बार बाढ़ आने से लोगों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया था। अब नूना नदी के पुराने धारा में वापस आ जाने से सिघिंया, घोड़ा चौक, बांसबाड़ी गांव का यही हाल होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन पर पूरी तरह नाराज दिखे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नूना नदी के पुरानी धारा में वापस करना था, तो सिघिंया, घोड़ा चौक व बांसवाड़ी तटबंध का मरम्मत सही ढंग से करना चाहिए था। प्रशासन इन तटबंधों का मरम्मत नहीं किया गया है, जो कभी भी ध्वस्त हो सकता है।

तटबंध की देखरेख करेंगे जल निस्सरण विभाग
सीओ विरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि नूना नदी में बाढ़ आ गयी है। यदि बाढ़ से स्थिति खराब होगी तो पीड़ितों को आश्रय स्थल पर रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि 72 घंटा बाढ़ का पानी रहने पर हीं सरकारी स्तर पर मुआवजा दिये जाने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि अब तटबंध का निर्माण करना असंभव है। जल निस्सरण विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि अब तटबंध का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। जहां पर भी तटबंध पर नदी का पानी दबाव बनायेगा, वहां पर तत्काल तटबंध की मरम्मत की जायेगी।

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