राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी मोहम्मद रियाज अत्तारी के तार अलसूफा से जुड़े हैं। यह संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के रिमोट स्लीपर सेल के तौर पर काम करता है। रियाज पांच साल से अलसूफा के लिए उदयपुर व आसपास के जिलों में काम कर रहा था।

यहां आपको बता दें कि 30 मार्च को चित्तौड़गढ़ के निम्बाहेड़ा में पुलिस ने 3 आतंकियों से 12 किलो विस्फोटक बरामद किया था। इससे जयपुर व अन्य जगह सीरियल ब्लास्ट की साजिश रच रहे थे। टोंक निवासी मुजीब इसी मामले में जेल में बंद है।

2014 में पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आया था गौस!
कन्हैयालाल के हत्या के दूसरे आरोपी गौस मोहम्मद को रियाज ने कुछ महीने पहले ही टीम में शामिल किया था। गौस 2014 में पाकिस्तान जाकर आया है। उसके वहां ट्रेनिंग लेने की बात भी सामने आ रही है। इसकी जांच की जा रही है। वो कराची गया था। लौटने के बाद गौस धर्म के नाम पर युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा था। गौस और रियाज के मोबाइल की जांच में कई देशों के नंर मिले हैं। इनमें से पाक के दो लोगों से लगातार संपर्क में थे। पूछताछ में चार और लोगों को हिरासत में लिया है। कई लोगों को चिह्नित भी किया गया है।

मुजीब का सबसे खास शागिर्द था रियाज
एनआईए सूत्रों के अनुसार मूल रूप से टोंक का रहने वाला मुजीब लंबे समय से उदयपुर में गाइड का काम करता था। उसने यहां अलसूफा का नेटवर्क खड़ा किया। रियाज उसका सबसे खास शार्गिद था। मुजीब की गिरफ्तारी के बाद एएनआई उसको पकड़ने की तैयारी कर रही थी। जांच में दोनों के अक्सर मिलने और मोबाइल पर लंबी बातचीत के सबूत मिले हैं। एएनआई के यहां पहुंचने से पहले ही उसने जघन्य हत्याकांड को अंजाम दे दिया।

2012 में रतलाम में बना अलसूफा संगठन, 5 साल बाद हुआ सक्रिय
अलसूफा का गठन 2012 में एमपी के रतलाम में हुआ। एनआईए ने 2015 में सरगना अमजद सहित छह लोगों को हिरासत में भी लिया था। 2017 में रतलाम के तरुण सांखला हत्याकांड में जुबैर व अल्तमस सहित 8 लोगों की गिरफ्तारी के बाद संगठन की कमर टूट गई, लेकिन इस साल यह फिर से सक्रिय हो गया।

दहशत फैलाना ही था वीडियो बनाने का मकसद
रियाज और गौस दहशत फैलाने के लिए अजमेर जाकर भी वीडियो बनाने वाले थे। इन्होंने कन्हैया की हत्या का प्लान बनाया था, लेकिन हत्या के वीडियो बनाने के लिए इन्हें ऊपर से निर्देश दिए गए थे।

खुद से बनाए थे वॉट्सएप ग्रुप
गौस 10-12 साल पहले दावत-ए-इस्लामी से जुड़ा था। वह अल्लाह के बंदे, लब्बैक या रसूलुल्लाह जैसे नाम से वॉट्सएप ग्रुप बनाकर करीब 1000 लोगों को कट्टरता के उपदेश दे रहा था। इन ग्रुप में धर्म रक्षा व देश में चल रहे माहौल के संबंध में पोस्ट शेयर करता था। इनमें युवा अगर पोस्ट की रिप्लाई करता था तो उसे टारगेट कर ब्रेनवॉश करता था। उसका सहयोग करने वाले 4 लोगों को पकड़ा है। मोबाइल जांच में कुछ पोस्ट डिलीट करने की जानकारी सामने आई है। जिसे रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है।

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