बिहार पर सूखे का संकट मंडरा रहा है। बारिश के आभाव में धान की रोपनी नहीं हो सकी। जो थोड़ी बहुत किसानों ने पानी पटा कर रोपनी कराई उसे बचाने में पसीने छूट रहे हैं। इस बीच खाद की किल्लत पैदा करके किसानों से अवैध उगाही जारी है। मुजफ्फरपुर जिले में खरीफ फसल के लिए उर्वरक खरीदने वाले किसानों से अधिक कीमत वसूली जा रही है। प्रखंडों में उर्वरक की कालाबाजारी भी हो रही है। डीएपी प्रति बैग डेढ़ सौ से 200 रुपये अधिक में बेची जा रही है।

किसानों को दुकानदार बता रहे है कि डीएपी कम आपूर्ति की जा रही है। इसलिए ऊपर से ही अधिक कीमत पर हमलोगों को मिल रहा है। यही हाल यूरिया की भी है। किसान को 90 से 100 रुपये अधिक कीमत पर प्रति बैग यूरिया मिल रही है। सरकार की ओर से यूरिया का रेट 266 रुपये 50 पैस 45 किलो के बैग के लिए निर्धारित है। लेकिन यूरिया ग्रामीण क्षेत्रों में 356 से लेकर 366 रुपये में बेची जा रही है। डीएपी का मूल्य सरकार ने 1350 रुपये निर्धारित किया है। जबकि बाजार में यह 15 सौ से लेकर 1550 रुपये तक बिक रही है। किसान इससे काफी परेशान हैं।

शिकायत पर कार्रवाई नहीं

कुढ़नी प्रखंड के केरमा निवासी संतोष कुमार ने बताया कि कृषि विभाग के दावों की पोल उर्वरक दुकानदार खोल रहे हैं। निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर डीएपी, यूरिया, जिंक और पोटाश बेच रहे हैं। शिकायत करनेवके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रहा है। अधिक कीमत का विरोध करने पर किसान को उर्वरक नहीं दिया जारहा है। कटरा के किसान राकेश कुमार ने बताया कि उन्हें 15 सौ रुपये में डीएपी दिया गया है। दुकानदार ने इससे कम में देने से मना कर दिया। मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत पर डीएपी खरीदनी पड़ी।

बनाया गया है हेल्पलाइन

उर्वरक की कालाबाजारी सहित अन्य गड़बड़ी रोकने के लिए हेल्पलाइन बनाया गया है। सहायक निदेशक कृषि अभियंत्रण शशि शेखर को नोडल पदाधिकारी, सहायक कृषि पदाधिकारी अमरेंद्र प्रसाद सिंह, लिपिक कुमार गौतम, तकनीकी सहायक गौरी शंकर झा को सहायक व सहयोगी बने हैं। जिला कृषि कार्यालय के अनुसार खरीफ फसल के लिए 46 हजार एमटी यूरिया का लक्ष्य तय किया गया है।

इधर जिला कृषि पदाधिकारी शिलाजीत सिंह का कहना है कि उर्वरक की कोई कमी नहीं है। अधिक कीमत लिए जाने की शिकायत पर कार्रवाई होगी। किसान 7319620004 नंबर पर शिकायत कर सकते है। जांच कर कार्रवाई होगी। जाहिर से ऐसे में बिचौलिए और दुकानदार मिलकर बनावटी किल्लत पैदा कर वसूली को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

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