आईआईटी पटना के इंक्यूबेशन सेंटर की ओर से विकसित फुल बॉडी डिसइन्फेंकटेंट मशीन का उद्घाटन सोमवार को आईएमए हॉल में हुआ। यह कोरोना वायरस से लोगों को बचाने में अहम भूमिका निभायेगी। यह मुख्य द्वार पर ही वायरस-बैक्टेरिया को नष्ट कर देता है। इसे मुख्य रूप से अस्पतालों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर भी लगाया जा सकता है। 

ट्रायल के तौर पर पटना एम्स में यह मशीन लगी है। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए आईआईटी पटना के निदेशक प्रो. त्रिलोक नाथ सिंह ने कहा कि आईआईटी का इंक्यूबेशन सेंटर बेहतर काम कर रहा है। युवाओं को बेहतर मार्ग दिखा रहा है। इसी कड़ी में फुल बॉडी डिसइन्फेंकटेंट मशीन भी है। 

आईएमए के निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह ने कहा कि यह मशीन वर्तमान समय में बेहतर रिजल्ट प्रदान करेगी। सभी स्थानों पर इसे लगाने की जरूरत है। इस मौके पर एम्स पटना के डॉ योगेश सिंह ने डिसइन्फेक्टेंट मशीन के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। 

उन्होंने कहा कि यह मशीन दो से तीन सेकेंड में इंसान के शरीर को डिसइंफेक्ट कर देगी। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि डिसइन्फेक्ट करने के लिए इससे लिक्विड नहीं, वेपर यानी वाष्प निकलेगा। वह भी आपके गर्दन से नीचे के शरीर को यह मशीन डिसइन्फेक्ट करेगी। 

वहीं, मशीन बनाने वाले वरुण कुमार शाही ने कहा कि इस मशीन से इंसान के शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसकी पुष्टि पटना एम्स की टीम ने मशीन को इस्तेमाल में लाने से पहले और बाद में जांच कर की है। इंसान के शरीर को डिसइन्फेक्ट करने के लिए इस मशीन में डब्ल्यूएचओ प्रमाणित केमिकल्स के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल किया गया है। आईआईटी पटना के इंक्यूबेशन सेंटर के मैनेजर जोसेफ पॉल ने मशीन के बारे में अधिक जानकारी दी। मौके पर आईएमए बिहार के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार के साथ अन्य लोग मौजूद थे। 

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