जमशेदपुर के बिष्टूपुर श्री रामकृष्ण मिशन स्कूल के छात्र अभिजीत शर्मा ने मैट्रिक में स्टेट टॉपर बनने का गौरव हासिल किया। उनके पिता अखिलेश शर्मा अखबार बांटते हैं और उसके बाद बढ़ई का काम घर-घर जाकर करते हैं। बड़ी मुश्किल से परिवार चलता है। मां तिलोका शर्मा गृहणी हैं। शास्त्रीनगर के ब्लॉक नंबर चार में एक छोटे से घर में भाड़े पर रहते हैं। घर का भाड़ा 3500 रुपये हर माह अभिजीत के पिता देते हैं।अभिजीत के पिता अखबार बांटकर व बढ़ई का काम कर प्रत्येक माह 10-12 हजार रुपये कमा लेते हैं। इसी से उनका पूरा परिवार चलता है। अभिजीत को कुल 500 नंबर में 490 अंक प्राप्त हुए हैं। हिंदी में 100, गणित में 100, साइंस में 99, सोशल साइंस में 97, इंग्लिश में 100 में 94 अंक अभिजीत ने हासिल किये हैं। अभिजीत ने कहा कि वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। बाल्डविन में 11वीं में नामांकन लिया है। शास्त्रीनगर में ही पूरा परिवार रहता है। कक्षा नौवीं तक अभिजीत ने कोई ट्यूश्न नहीं लिया। मैट्रिक की परीक्षा को लेकर कुछ महीने पहले ट्यूशन लिया।संघर्ष भरी है कहानीमैट्रिक की परीक्षा के स्टेट टॉपर छात्र अभिजीत शर्मा की संघर्ष भरी कहानी है। कदमा के भाटिया पार्क के निकट स्थित पेट्रोल पंप के पीछे रहने वाले कारपेंटर अखिलेश शर्मा के बेटे अभिजीत शर्मा अपने मात-पिता के इकलौते पुत्र हैं। पिता का काम जब काम मंदा पड़ा तो अब अखबार की हॉकरी करने लगे। वे अपने बेटे को टाटा स्टील की अप्रेंटिस प्रतियोगिता में डालकर कंपनी का कर्मचारी बनाना चाहते थे। लेकिन, बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता है, इसलिए वर्तमान में उसका दाखिला बाल्डविन स्कूल में साइंस में करा दिया है।कोरोना में मांगकर भरा परिवार का पेटपिता अखिलेश शर्मा अपने बेटे की शिक्षा को लेकर जो व्यथा बताते हैं, उसमें उनका संघर्ष छुपा है। उन्होंने बताया कि शुरू से ही उनका बेटा पढ़ाई में ही लीन रहा। पढ़ाई के अलावा उसने कभी किसी पर ध्यान नहीं दिया। उन्हें लगता था कि उनका बेटा कभी न कभी कुछ करेगा, इसीलिए उसका दाखिला रामकृष्ण मिशन स्कूल में कराया। उसकी शिक्षा को लेकर वे लोग हमेशा चिंतित रहते थे। उनके लिए कोरोना काल सबसे विषम परिस्थितियों वाला रहा। उनके पास खाने को भोजन तक नहीं था। जो दान देता था, उसके यहां जाकर राशन लाते थे और तब घर का चूल्हा जलता था। लेकिन, फिर भी बेटे की पढ़ाई पर कभी आंच आने नहीं दी। उस वक्त मोबाइल की आवश्यकता थी, क्योंकि पढ़ाई ऑनलाइन हो रही थी। लिहाजा, उन्होंने कर्ज लेकर एक सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदा और उसका कर्ज अब तक चुकता कर रहे हैं। बेटे को कभी हारने या निराश होने नहीं दिया। क्योंकि, मालूम था कि उनका बेटा उनका नाम रोशन करेगा और आज जब लोगों के कॉल आना शुरू हुए तो गर्व का अहसास हुआ। बेटे ने राज्य में टॉप किया है। उस खुशी को बयान नहीं किया जा सकता।मां तिलोका शर्मा कहती हैं कि बेटा तो उनका दोस्त है और वह दोस्त की तरह हमेशा अपनी बातें शेयर करता है। उसकी बातों से लगता था कि शिक्षा ही उसके जीवन का आधार है और उसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना है। इसी दिशा में उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज उसने माता-पिता दोनों का नाम रोशन किया है।मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद निवासी अखिलेश शर्मामूल रूप से बिहार के औरंगाबाद निवासी अखिलेश शर्मा के अनुसार घर-घर घूमकर कारपेंटर का काम जब कम मिलने लगा तो उन्होंने हॉकर बनकर पेपर बांटना शुरू किया और आज भी वही कर रहे हैं। इससे उनका घर चल रहा है और बच्चे की पढ़ाई भी। वे कदमा इलाके में पेपर भी बांटते हैं। हर परिस्थिति को उन्होंने अपने बेटे के लिये जिया है और वे चाहते हैं कि बेटा जैसे आज नाम रोशन कर रहा है कल भी वह इसी तरह बुलंदियों पर चमके। इसी उद्देश्य के साथ अपने ग्राहकों से कर्ज मांग कर उसका दाखिला अंग्रेजी माध्यम स्कूल में कराया है। एडमिशन के लिए लोगों ने कर्ज दिया। उन्होंने कहा है कि पढ़ाई जारी रखो कर्ज लौटाते रहना। अखिलेश शर्मा के अनुसार वे मैट्रिक फेल हैं। मां ने कक्षा तीन तक की पढ़ाई की है, लेकिन वे बेटे को शिक्षा जगत के शीर्ष पर देखना चाहते हैं। अखिलेश शर्मा ने बताया कि आज उन्हें बहुत इच्छा थी कि वे अपने बेटे की सेल्फी लेकर आप सबको सब मीडिया वालों को भेजते, लेकिन आज सुबह ही उनका मोबाइल फोन गिरकर टूट गया। अभी उस मोबाइल का कर्ज भी अदा नहीं हुआ है,

लेकिन खुशी की बात है कि सुबह का गम शाम में बेटे की उन्नति और उसके विजय पर भारी पड़ गया।

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