समस्तीपुर;- राज्य व देश के महापर्व के नाम से प्रसिद्ध छठ पूजा का एक पखवाड़ा भी नहीं रह गया है। जबकि छठ घाटों की स्थिति अति बारिश व नदियों में आए बाढ़ के कारण बदतर व खतरनाक बनी हुई है। बताया जाता है कि बूढ़ी गंडक नदी में करीब तीन माह तक खतरे के निशान से उपर जलस्तर रहने के कारण यहां के सभी घाटों की हालत बदतर बनी हुई है। जहां नीम घाट पर नदी के बढ़े जलस्तर ने बड़े-बड़े नाले बना दिए हैं वहीं उसके बाद बने पक्के घाट पर पूरी तरह से बाढ़ की मिट्टी व गंदगी से ढंक गया है।

वहीं प्रसाद घाट, पेठिया गाछी घाट, काली मंदिर घाट, लचका पुल घाट, मगरदही घाट, पीपड़ा घाट, पुरानी दुर्गा स्थान घाट सहित दर्जनभर से ज्यादा घाट पर गंदगी व कीचड़मय स्थिति बनी हुई है। वहीं इसको लेकर डीएम सह निगम प्रशासक ने भी आदेश दिया है। बताया जाता है कि जल्द काम शुरू नहीं किया गया तो छठ पर्व के समय में सिर्फ खानापूर्ति ही की जा सकेगी। जिससे छठ व्रतियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।

मिट्टी कटाव से घाटों की स्थिति बनी खतरनाक लगभग सभी घाटों पर बैरिकेडिंग की जरूरत बताया जाता है कि इस बार तीन माह से ज्यादा समय तक बूढ़ी गंडक नदी में पानी बढ़े रहने से मिट्टी कटाव हुई है। जिससे मगरदही, नीम घाट, पीपड़ा आदि घाटों पर खतरनाक स्थिति बनी है। कटाव वाली जगहों पर घाट के किनारे ही अधिक पानी है। ऐसे में नदी के अंदर लगभग सभी घाटों पर बैरिकेडिंग की जरूरत है।

आयुक्त ने नौ पर्यवेक्षीय पदाधिकारी को सौंपी समय से घाट दुरुस्त कराने की जिम्मेवारी निगम प्रशासक के निर्देश बाद आयुक्त ने नौ पर्यवेक्षीय अधिकारी को नियुक्त कर शहर के सभी घाटों व पोखरों को दुरूस्त कराने का निर्देश दिया है। ये सभी अधिकारी 3 नवंबर तक सभी घाटों व पोखरों पर सीढ़ी की मरम्मती, बैरिकेडिंग, विद्युत आपूर्ति व व्यापक रोशनी, चेंजिंग रूम व शौचालय की व्यवस्था कराएंगे।

source-भास्कर

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