समस्तीपुर। जिले में मां की ममता को तार-तार करने वाली घटना सामने आई है। जहां एक मां ने अपने बच्ची को सड़क पर फेंक दिया। वह भी रात के अंधेरे में..। हालांकि ग्रामीणों की पहल के बाद नवजात बच्ची अभी इलाजरत है। हालांकि उसके सिर, आंख, नाक व पांव में गंभीर जख्म है। सिर व आंख में सबसे अधिक चोटें आई है। यह वाकया जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र के अकौना गांव का है। बुधवार की रात्रि गांव में सड़क किनारे नवजात बच्ची फेंकी मिली। गांव के कुछ लोगों की नजर उस मासूम पर पड़ी। तत्काल इसकी सूचना हसनपुर थाना को दी गई। पुलिस वहां पहुंची और बच्ची को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हसनपुर लाया गया। ऑन ड्यूटी चिकित्सक ने उसे तुरंत सदर अस्पताल रेफर कर दिया। सदर अस्पताल में एसएनसीयू में कार्यरत डा. अनिल कुमार कंचन ने इलाज शुरू किया। चिकित्सक ने मरहम पट्टी के बाद संभावित संक्रमण से बचाने के लिए गुरुवार को एसकेएमसीएच रेफर कर दिया। पुलिस मामले की जांच शुरू कर चुकी है। पुलिस यह पता लगाने में जुट गई है कि नवजात को आखिरकार कहां से लाकर वहां पर फेंका गया। डीएमसीएच में ड्रेसिग के बाद बच्ची को लौटा दिया समस्तीपुर

सदर अस्पताल में नवजात के पहुंचते ही प्रशासनिक स्तर पर शिशु संग्रहण केंद्र को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही बुधवार की रात्रि समन्वयक अनिपा कुमारी, गृह प्रभारी सौरभ कुमार व नर्स रीना श्री मौके पर पहुंच गए। चिकित्सक ने बच्ची का इलाज करने के बाद उसे डीएमसीएच रेफर किया। इसके बाद रात्रि करीब 1.30 बजे उसे डीएमसीएच ले जाया गया। जहां पर चिकित्सक ने ड्रेसिग के बाद उसे पुन: सदर अस्पताल भेज दिया। बताया जाता है कि डीएमसीएच ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। बच्ची गुरुवार सुबह 5.30 बजे वापस लौट कर सदर अस्पताल पहुंची। जहां पर फिर से उसे एसएनसीयू में रखा गया। प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार ने एसकेएमसीच मुजफ्फरपुर में बात करने के बाद उसे दोपहर बाद भेज कर भर्ती कराया गया। अज्ञात व लावारिस बच्चे को पालना गृह में डालने की अपील

अज्ञात व लावारिस बच्चों को सम्मानजनक जिदगी देने के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई की ओर से पूर्व में ही एक अच्छी पहल की गई। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नौशाद रजा ने कहा कि लोगों से बार-बार अनुरोध करने के बाद भी नवजात को यत्र-तत्र फेंक रहे है। यह गलत है। किसी कारणवश पालने में सक्षम ना हो तो पालना शिशु संग्रहण केंद्र ममता शिशु गृह दुधपुरा में छोड़ दें। ताकि नवजात बच्चों का जीवन असुरक्षित न हो। यहां से बच्चा गोद देने की प्रक्रिया चल रही है। इच्छुक लोग वेबसाइट पर पंजीकरण कर कानूनी प्रक्रिया से बच्चा गोद ले सकते हैं।

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