वित्त मंत्रालय का मानना है कि त्योहारी सीजन में मैन्यूफैक्च¨रग में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। क्योंकि पिछले कुछ महीनों से औद्योगिक ¨जसों की कीमतें घट रही हैं और त्योहारी सीजन में उपभोक्ता मांग में भी इजाफा होगा। मंत्रालय का मानना है कि ग्रामीण और शहरी दोनों जगहों पर उपभोक्ता खपत में बढ़ोतरी होगी। औद्योगिक जिंसों के दाम कम होने से त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों पर वस्तुएं नहीं खरीदनी पड़ेगी।

मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों को मिलेगी ताकत

आरबीआइ के सर्वे में भी कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों के उत्पादन और नए ऑर्डर में बढ़ोतरी होगी। मैन्यूफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स में पिछले तीन महीनों से लगातार दहाई अंक में बढ़ोतरी भी मैन्यूफैक्चरिंग में तेजी के संकेत दे रही है। सितंबर माह से त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है जो साल के आखिर तक रहेगा।

ग्रामीण मांग में बढ़ोतरी के आसार

वित्त मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून के कारण खरीफ की बुवाई को मदद मिल रही है और न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी से ग्रामीण मांग में बढ़ोतरी की संभावना है। मंत्रालय के मुताबिक संपर्क से चलने वाले सेक्टर से लोग अब परहेज नहीं कर रहे हैं और लोग खुलकर सैर-सपाटे के साथ होटल व रेस्टोरेंट में जा रहे हैं। इससे शहरी इलाकों की खपत में इजाफा होगा।

पीएमआई में लगातार बढ़ोतरी

मंत्रालय के मुताबिक टूरिज्म, होटल जैसे उद्योग एक बार फिर से कोरोना काल से पूर्व की स्थिति में पहुंच रहे हैं। पिछले दो महीने से सेवा सेक्टर के परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस साल फरवरी माह के आखिर में रूस यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद स्टील, तांबा, एल्युमीनियम, जिंक, चांदी जैसे औद्योगिक जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन जून के बाद से इन जिंसों के भाव में लगातार गिरावट हो रही है।

वैश्विक दाम लगातार हो रहे कम

कच्चे तेल के वैश्विक दाम भी लगातार कम हो रहे है। औद्योगिक निर्माताओं के मुताबिक वे अब त्योहारी सीजन में अपनी पूरी क्षमता से मैन्यूफैक्चरिंग करेंगे क्योंकि उनकी लागत कम हो गई है। लागत कम होने से उनका मार्जिन भी प्रभावित नहीं होगा।

उपभोक्ताओं को भी राहत के आसार

कंज्यूमर ड्यूरेबल और रिटेल कारोबारियों के मुताबिक लागत कम होने से अब वस्तुओं की कीमतें भी नहीं बढ़ेंगी और हो सकता है कुछ वस्तुओं पर उपभोक्ताओं को राहत मिल जाए। दूसरी तरफ सरकार भी अर्थव्यवस्था में लगातार निवेश कर रही है। पूंजीगत व्यय के रूप में पहली तिमाही में 1.75 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं और इससे भी अर्थव्यवस्था में नई मांग निकलेंगी। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here