नोएडा सेक्टर 93A में बने ट्विन टावर अब केवल तस्वीरों में ही नजर आएगा। असल में उसका अस्तित्व धराशाही हो गया है। महज एक बटन दबाते ही इमारत में लगाए गए विस्फोटकों में धमाका हुआ और टावर ‘पानी के झरने’ की तरह नीचे गिरे तो धूल का गुबार आसमान में फैल गया।

टावर्स को 15 सेकंड से भी कम समय में ‘वाटरफॉल इम्प्लोजन’ तकनीक से ढहा दिया गया। फिलहाल कहीं से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। धूल का गुबार हटने के बाद ही आसपास की इमारतों की जांच होगी और यह देखा जाएगा कि क्या कहीं नुकसान भी हुआ है। इन इमारतों को पहले ही खाली करा लिया गया था। आसपास की सड़कें भी पूरी तरह बंद थीं और लॉकडाउन के बाद पहली बार इस तरह का सन्नाटा इलाके में देखा गया। नोएडा एक्सप्रेस-वे पर भी यातायात रोक दिया गया था।

अभी बड़ा काम बाकी


ट्विन टावर को गिराए जाने के बाद निश्चित रूप से बड़ी सफलता हासिल हुई पर अभी भी एक बड़ा काम बाकी है। दरअसल, इन इमारतों के ढहने के बाद लगभग 80 हजार टन मलबा निकलेगा, जिन्हें साफ करने में कम से कम 3 महीने का समय लगेगा। पूरे इलाके में धूल की एक मोटी परत जम गई है, जिन्हें युद्धस्तर पर साफ होना है।

इन नियमों की अनदेखी की वजह से गिराए गए टावर

  1. नेशनल बिल्डिंग कोड के नियमों की अनदेखी कर टावर को मंजूरी मिली थी।
  2. दोनों टावर के बीच की दूरी 16 की बजाय सिर्फ 9 मीटर रखी गई।
  3. टावर वहां बने जहां ग्रीन पार्क, चिल्ड्रन पार्क और कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स बनने थे। इससे घरों में धूप आनी बंद हो गई थी।

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