समस्तीपुर। बागमती नदी का जलस्तर क्या बढ़ा, बिथान के निचले इलाके में रह रहे दर्जनों परिवार बेघर हो गए हैं। चार पंचायत के निचले इलाके में रहने वाले लोग तटबंध और रेलवे गुमटी के पास शरण ले चुके हैं। तटबंध पर पालीथिन का आशियाना बनाकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। जब-जब नदी में पानी बढ़ता है, उन्हें इन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। बेलसंडी, नरपा, सलहाबुजूर्ग, सलहा चंदन पंचायत के तेतराही, नरपा, कौराही, खुटौना, बनभौरा, भुईधर, खोटातीलकपुर आदि गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से यातायात बाधित हो गया है। करेह, कमला, कोशी, बागमती नदी का प्रभावित पंचायत के लोगों का एकमात्र सहारा नाव हीं है। इन प्रभावित चार पंचायतों में बाढ़ का पानी प्रवेश करते ही लोग ऊंचे स्थान पर शरण लिए हुए हैं। प्रखंड के बाढ़ प्रभावित पंचायतों में मुख्य सड़क जलमग्न हो जाने के कारण दर्जनों गांवों का संपर्क प्रखंड, अनुमंडल एवं जिला मुख्यालय से भंग हो गया है। नदियों के जलस्तर में वृद्धि से निर्माणाधीन हसनपुर-सकरी रेलवे लाइन, तटबंध, स्कूलों एवं ऊंचे स्थानों पर लोग शरण लिए हुए हैं। रेलवे लाइन के किनारे रह रहे सौ से अधिक परिवार के लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। न पीने का शुद्ध पेयजल है और न भोजन की समुचित व्यवस्था। लोग किसी तरह गुजारा बसर कर रहे हैं। पीड़ितों में भुल्ली देवी, मनोज यादव, सरोज यादव, बाईजू पंडित, सिकंदर चौपाल, अनिल चौहान, राजेंद्र चौहान ने बताया कि हर साल हम लोगों के घर में बाढ़ का पानी प्रवेश करता है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण बिथान प्रखंड के सभी पंचायतों के लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। करेह, कमला, कोशी नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से ग्रामीण बाढ़ से भयभीत है। गांव की प्रमुख सड़कों पर बाढ़ का पानी सड़क से ऊपर से बह रहा है। अंचल अधिकारी विमल कुमार कर्ण ने बताया कि बाढ़ प्रभावित पंचायतों का दौरा कर यातायात बहाल करने के लिए नाव परिचालन के लिए नाव का परवाना दिया जा रहा है ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को यातायात में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।

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