नवादा जिले के गोविन्दपुर प्रखंड के बाराटांड गांव में बुखार ने कहर ढाया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई है। अन्य ग्रामीण बुखार से पीड़ित हैं। शनिवार को रोगियों की संख्या बढ़ने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। डीएम यश पाल मीणा के निर्देश पर मेडिकल टीम गांव पहुंची हैं और ग्रामीणों की जांच कर इलाज में जुटी है। बताया गया कि गांव में पिछले छह दिनों के अंदर दो-दो दिनों के अंतराल पर एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई है। 

मृतकों में बाराटांड़ निवासी रामविलास राजवंशी की पत्नी लालो देवी (40 वर्ष ), दो बेटियां करिश्मा कुमारी (9 वर्ष) एवं सोनम कुमारी उर्फ करिमा कुमारी (3 वर्ष) है। एक ही परिवार के तीन सदस्य की बुखार लगने से मौत हो गई। दो अन्य महिला की हालत गंभीर हैं। जिसके बाद ग्रामीणों ने घटना की जानकारी स्थानीय पंचायत की मुखिया अफरोजा खातून को दी। मुखिया ने तत्काल डीएम, बीडीओ और सिविल सर्जन डॉ. निर्मला कुमारी को मामले से अवगत कराया है। जिसके बाद डीएम के निर्देश पर मेडिकल टीम गांव में कैंप कर रही है।  

सीएचसी में दो मरीज किए गए है भर्ती

गांव की दो महिलाओं को सीएचसी में इलाज के लिए भर्ती किया गया है। जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि महिलाओं का विडाल टेस्ट किया गया है, जिसमें एक महिला टाइफाईड से ग्रसित पायी गई है। दोनों महिलाओं का इलाज जारी है। उन्होंने बताया कि गोविन्दपुर का क्षेत्र मलेरिया रोग से प्रभावित होनेवाले इलाकों में शामिल हैं। ऐसे में मेडिकल टीम मलेरिया, कालाजार और टाइफाईड का जांच कर रही हैं। 

मेडिकल टीम तैनात

जिला पदाधिकारी के आदेशानुसार सीएचसी र्गोंवदपुर के स्वास्थ्य प्रबंधक अरविंद कुमार को घटनास्थल पर तुरंत डॉक्टरों की टीम को भेजने को कहा गया। मेडिकल ऑफिसर डॉ. र्रंवद्र कुमार विश्वकर्मा, फार्मासिस्ट प्रमोद कुमार एवं जितेंद्र कुमार को भेजा गया। डॉक्टरों ने स्थिति का जायजा लिया है। बताया कि तीन लोगों की मौत बुखार लगने के कारण हुई है और उसी परिवार के दो अन्य लोग बीमार है। जिसे इलाज के लिए बीडीओ के वाहन से सीएचसी लाया गया। इलाजरत महिलाओं में निभा कुमारी और बेबी देवी शामिल हैं।

विशेषज्ञ चिकित्सक कर रहे मामले की जांच

गांव में बुखार से तीन लोगों की मौत होने की जानकारी मिलते ही सिविल सर्जन ने विशेषज्ञ चिकित्सक को गोविन्दपुर भेजा। गोविन्दपुर सीएचसी पहुंचे जिला वाहक जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. वीरेन्द्र कुमार से आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से खास बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि गांव निवासी रामविलास राजवंशी ने अपनी बीमार पत्नी और दो बच्चे को रामपुर गांव के एक ग्रामीण चिकित्सक से इलाज कराया था। पीड़ति सीएचसी गोविन्दपुर भी पहुंचे थे, लेकिन उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पावापुरी स्थित वद्र्धमान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (विम्स) रेफर किया गया। लेकिन रामविलास राजवंशी उन्हें विम्स लेकर नहीं गया और स्थानीय ग्रामीण चिकित्सकों से ही इलाज करायी। गंभीर हालत में रहे मरीजों की एक-एक करके मौत हो गई। 

एसडीओ भी पहुंचे गांव, हो रही कोरोना जांच

घटना के बाद रजौली एसडीओ चन्द्रशेखर आजाद भी देर शाम बाराटांड गांव पहुंचे। गांव में मेडिकल टीम पहले से ही कैम्प कर रही थी। इस बीच डीएम के आदेश पर पूरे गांव के प्रत्येक ग्रामीण की कोविड-19 जांच भी की जा रही है। सिविल सर्जन डॉ. निर्मला कुमारी ने कहा कि जिला स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त दवाएं, चिकित्सक और स्थिति से निबटने को संसाधन हैं। ग्रामीण हतोत्साहित नहीं हो। स्वास्थ्य विभाग हरसभंव चिकित्सा दे रहा है। सिविल सर्जन ने ग्रामीणों से अपील की है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज को पहुंचे। आस पड़ोस के ग्रामीण चिकित्सकों से इलाज कराने के दौरान स्थिति बिगड़ने पर उन्हें सरकारी अस्पताल ही भेजा जाता है। ऐसी स्थिति आने के पहले ही सरकारी अस्पताल में पहुंच जरूरी व सटीक इलाज कराएं।

इस मामले की जानकारी होते ही गोविन्दपुर प्रखंड के बाराटांड गांव में अफसरों और डॉक्टरों की टीम भेजी गई है। एहतियातन वहां के पूरे टोले में 60 लोगों की कोविड जांच की गई, लेकिन कोरोना का मरीज नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम गांव में कैंप कर रही है। -यशपाल मीणा, डीएम, नवादा

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