वैसे तो कोरोना को लेकर पूजा-पाठ में भीड़ लगाने अथवा मेले लगानी की मनाही है। बावजूद प्रखंड के गहबरों में नागपंचमी मेले को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। क्षेत्र में पड़ने वाले सभी गहवर सज धंज कर तैयार हैं। रात्रि जागरण के साथ ही अहले सुबह से पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो जायगा। वंश वृद्धि की कामना लेकर मन्नत मांगने वाले लोगों द्वारा सुबह से ही गहबरों में झांप और दूध लाबा चढ़ाने का काम शुरू हो जायगा। इसके बाद सिंघियाघाट, नरहन सहित गांवों के एक दर्जन गहवरों मेंभगतों द्वारा मानर की थाप पर संपों का प्रदर्शन शुरू हो जाता है। दैविक और लौकिक परपंराओं को प्रति लोगों की आस्था इतनी अधिक है कि नागपंचमी के दिन लोग सांप को भी दूध-लावा चढ़ाते हैं और पारंपरिक अपने वंश वृद्धि और समृद्धि की कामना करते हैं। सावन  महीने के कृष्ण पक्ष में पंचमी के दिन प्रखंड के गहबरों में नाग की पूजा पौराणिक परंपरा के अनुकूल पंचमी के दो दिन पूर्व शुरू होकर पंचमी के दो दिन बाद जाकर संपन्न होता है। यह परपंरा प्रखंड के सिंघियाघाट, नरहन सहित अन्य गहवरों में सैकड़ों बर्षो से जारी है। जिसे देखने जन सैलाव उमड़ता है। जिसमें महिलाओं की संख्या सर्वाधिक रहती है। सिंघियाघाट में तीन गहवर हैं जिसके भगत राम सिंह, सुरेश पासवान, बतहू पासवान हैं। ये बतातें हैं कि यह पौराणिक परंपरा सैकड़ों बर्षो से जारी है। विषधरों का प्रदर्शन, झांप, दूध-लावा का चढ़ावा से लेकर गहवरों में महिलाओं द्वारा खोईंछा भरने से लेकर मुंडन तक का कार्यक्रम जारी रहता है।

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