सावन की पहली सोमवारी पर देवघर में भक्तों की भीड़ उमड़ी है। बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक के लिए भक्त रविवार की रात 10 बजे से लाइन में लग गए। सोमवार की सुबह 3 बजे तक 12 किलो मीटर से लंबी लाइन लग गई थी। पूरी रात इंतजार के बाद सुबह 4 बजे से बाबा का जलाभिषेक हुआ।

सुबह 3ः05 बजे बाबा बैद्यनाथ का पट खुल गया और विधि विधान से सावन के सोमवार की पहली सरदारी पूजा की गई। पंडा समाज की विशेष पूजा लगभग 55 मिनट तक चली। इसके बाद आम भक्तों को बाबा को स्पर्श किए बगैर बाहर से अर्घ्य से जलाभिषेक कराया गया।

रात में शिवगंगा पर भक्तों की भारी भीड़

रविवार की रात में भी बाबा मंदिर के बाद शिवगंगा पर काफी भीड़ रही। भक्त रात में ही जल लेकर लाइन में लग गए। रात में स्नान कर भक्त लाइन में लग गए और सुबह बाबा का जलाभिषेक किया। मंदिर प्रशासन ने पहली सोमवारी को लेकर लाइन की व्यवस्था कराई थी, बताया गया कि 12 किलो मीटर से लंबी लाइन सुबह तक लग गई.

कुएं के जल से बाबा बैद्यनाथ को जगाया गया

सावन के पहले सोमवार पर बाबा का पट विशेष पूजा-अर्चना के साथ सुबह 3 बजकर 5 मिनट पर खोला गया। इसके बाद मंदिर प्रांगण में स्थित चंद्रकूप कुआं के काचा जल से बाबा को जगाया गया। लगभग 20 मिनट तक बाबा को काचा जल पंडा समाज ने चढ़ाया। इसके बाद विशेष सरदारी पूजा की गई।

मान्यता के अनुसार, बाबा को काचा जल चढ़ाकर उनसे पूजा अर्चना के लिए अनुमति ली जाती है, इसके बाद ही बाबा की सरदारी पूजा की जाती है। सावन के पहले सोमवार को सरदारी पूजा में बाबा को चंदन के लेप के साथ विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों के सहित बेलपत्र अर्पित किया गया। 28 मिनट तक चली सावन की पहली सरदारी पूजा के बाद लगभग 4 बजे आम भक्तों को अर्घ्य से जलाभिषेक कराया गया।

देवघर में सुबह से जलार्पण के लिए पहुंचे श्रद्धालु।

देवघर में सुबह से जलार्पण के लिए पहुंचे श्रद्धालु।

सावन के पहली सोमवारी पर बाबा की उपासना

  • 3ः05 बजे सुबह बाबा का पट खोला गया
  • 10 मिनट तक लगातार बाबा को काचा जल चढ़ाया गया
  • 3.15 से बाबा अर्ध्य पूरी तरह से साफ कराया गया
  • 3.32 बजे से बाबा की सरदारी पूजा आरंभ हुई
  • 4 बजे तक चली पहले सोमवार पर बाबा की सरदारी पूजा
  • 4 बजे से सावन के पहले दिन आम भक्तों के लिए मंदिर खुला

अर्घ्य से जलाभिषेक की व्यवस्था

सावन की पहली सोमवारी को लेकर प्रशासन की कड़ी व्यवस्था बनाई गई थी। भीड़ को देखते हुए स्पर्श पूजा पहले से ही बंद कर दी गई है। सिर्फ पंडा समाज द्वारा ही बाबा को स्पर्श पूजा कराया जा रहा है। बाबा के गर्भ गृह में आम भक्तों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक सावन के पहले दिन से ही है। सोमवार को सुबह 4 बजे से आम भक्तों की पूजा शुरु हुई तो भीड़ से पूरा मंदिर प्रांगण ठसाठस भर गया था। कहीं पर तिल रखने की जगह नहीं थी। भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ती गई। हालांकि जलाभिषेक के लिए अर्घ्य सिस्टम करने से भीड़ का असर अधिक नहीं दिख रहा है। बहुत जल्द लोग जलाभिषेक कर खाली हो जा रहे हैं। बाबा के गर्भ गृह के बाहर अर्घ्य की व्यवस्था की गई है, जहां भक्त अपना जल अर्पित कर रहे हैं जो बाबा को चढ़ रहा है। बाबा के दर्शन के लिए प्रागंण में बड़ी बड़ी एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था की गई है। सावन के पहले सोमवार पर रात से प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद दिखा। भक्तों की लाइन में व्यवस्था देखने के साथ सुरक्षा को लेकर भी अलर्ट रहा।

बाबा के जलाभिषेक पर विशेष दिन टूटेगा भीड़ का रिकॉर्ड

  • 24 जुलाई रविवार : कामदा एकादशी
  • 25 जुलाई सोमवार : सावन का दूसरा सोमवार, प्रदेाष व्रत
  • 26 जुलाई मंगलवार : मासिक शिवरात्रि
  • 28 जुलाई गुरुवार : हरियाली अमावस्या
  • 31 जुलाई रविवार हरियाली तीज, मधुश्रावणी समापन
  • 1 अगस्त सोमवार : सावन का तीसरा सोमवार
  • 2 अगस्त मंगलवार : नागपंचमी
  • 8 अगस्त सोमवार : सावन का चौथा सोमवार, पुत्रदा एकादशी
  • 12 अगस्त शुक्रवार : सावन पूर्णिमा, रक्षाबंधन

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