भागलपुर घूमने आई नेपाल पुलिस के हवलदार की पत्नी से जबरन शादी करने का मामला प्रकाश में आया है। महिला जब घूमने आई तो उसकी मुलाकात एक युवक से हो गई। उसने उसे अपने जाल में फंसा लिया और उसके बेटे को अगवा कर जबरन उससे कोर्ट में शादी कर ली। पति जब खोजते-खोजते पहुंचा तो उसने पुलिस से मदद मांगी, लेकिन जमादार ने 15 हजार रुपए लेकर उसे भगा दिया। अब थक हारकर पीड़ित पति पत्नी और बच्चों की रिहाई की मांग को लेकर DIG के पास पहुंचा है।

यह घटना घटी है नेपाल के इनरवा थाना में पदस्थापित हवलदार जितेन्द्र यादव की पत्नी कुसुम के साथ। बताया जाता है कि कुसुम देवर धर्मेंद्र यादव और दो छोटे बच्चों आरोही (7 वर्ष) और रियांश (2 वर्ष) के साथ भागलपुर आई थी। यहां आने के बाद वह जीरोमाईल थाना क्षेत्र के गोपालपुर निवासी कक्कू यादव के मकान में किराए पर रहने लगी। वहां उसकी मुलाकात श्रवण मल्लिक से हुई। श्रवण मल्लिक उसे जबरन सहरसा ले गया और बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर कोर्ट में शादी कर ली।

शादी करने के 6 महीनों के बाद दोनों सहरसा से फिर भागलपुर आ गए। श्रवण की पहली पत्नी रानी देवी को जब दूसरी शादी की जानकारी हुई तो उसने कुसुम को भला बुरा कहा। कुसुम ने अपनी सारी आपबीती सुनाकर उससे सहायता मांगी। इसके बाद उसने कुसुम को वहां से निकालने के लिए उसे लेकर अपने मायके चली गई। परबत्ता थाना इलाके के बहतरा गांव पहुंची। यहां नेपाल पुलिस के हवलदार जितेंद्र यादव को बुलाकर कुसुम को सौंप दिया। तब तक श्रवण कुसुम के बेटे रियांश को लेकर फरार हो गया।

पीड़ित जितेन्द्र का आरोप है कि कुसुम बच्चे के अपहरण का मामला दर्ज कराने परबत्ता थाना पहुंची तो थानाध्यक्ष ने बरारी थाना भेज दिया। बरारी थाने के जमादार रामप्रवेश यादव ने 25 हजार की मांग की। इस पर उसे 15 हजार रुपए दिए। जमादार ने वादा किया कि अगले दिन बच्चे की बरामदगी हो जाएगी, लेकिन अगले दिन से वह टाल-मटोल करने लगा। दूसरे दिन जब थाना पहुंचा तो जमादरा ने जबरन (पत्नी को लेकर जा रहा हूं) लिखवा कर थाने से भगा दिया। विरोध किया तो गाली गलौज की।

जितेन्द्र की ओर से बेटे की बरामदगी के लिए DIG को दिया गया आवेदन।

जितेन्द्र की ओर से बेटे की बरामदगी के लिए DIG को दिया गया आवेदन।

पुलिस के सामने थाने में आरोपी के परिजनों ने पीटा

पीड़ित के अनुसार, इसके बाद फिर से बरारी थाने गया। इस बार घूसखोर जमादार ने आरोपी श्रवण मल्लिक को बुलाया, लेकिन वह नहीं आया। कहा कि कुसुम को श्रवण के पास भेज दीजिए, तब वह बच्चे को लौटाएगा। थाना पर श्रवण तो नहीं आया, लेकिन श्रवण की मां, बहन और कुछ लोग आए। सभी ने पुलिस के सामने ही हमारे साथ मारपीट की। जमादार चुपचाप तमाशा देखता रहा। बचाव करने की गुहार लगाई तो उसने फिर गाली गलौज कर भगा दिया।

पीड़ित ने बरारी थानाध्यक्ष नवनिश कुमार को इस बात की जानकारी दी, लेकिन थानाध्यक्ष ने रामप्रवेश यादव पर कार्रवाई करने के बदले जितेन्द्र यादव को नौगछिया एसपी का नंबर देकर बरारी थाना से जाने को कह दिया।

परबत्ता थाना में मामला हुआ दर्ज

उसने बताया कि नौगछिया एसपी से बात करने पर उन्होंने इसकी जानकारी एसडीपीओ दिलीप कुमार को दी। एसडीपीओ दिलीप कुमार ने मामले को तुरंत परबत्ता थाने में दर्ज करवाया। फिलहाल पीड़ित जितेन्द्र यादव ने भागलपुर डीआईजी को आवेदन देकर बच्चे की बरामदगी की गुहार लगाई है।

नौगछिया एसडीपीओ दिलीप कुमार ने बताया कि बरारी थाना के जमादार ने पीड़ित से 15 हजार रुपए लेकर उसे थाने से भगा दिया। थाने में आरोपी के परिजनों ने पीड़ित के साथ मारपीट भी की है। बरारी थानाध्यक्ष अवनीश कुमार को फटकार लगाई गई है। उन्होंने बताया कि अगर किसी जमादार ने ऐसा किया है तो उसमें थानाध्यक्ष की भी सहभागिता है। दोनों पर कार्रवाई की जाएगी।

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