दरभंगा। बाढ़ से निजात दिलाने को लेकर बिहार प्रदेश जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष डॉ. राम मोहन झा के नेतृत्व में प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के समक्ष शुक्रवार को दर्जनों लोग सामूहिक उपवास पर बैठे। मौके पर डॉ. झा ने कहा कि 1954 से बिहार में बाढ़ आ रही है। यह अब अंतरराष्ट्रीय मुद्दा चुका है। नेपाल के पहाड़ों से आने वाली नदियां बिहार में तबाही मचा रही हैं। बिहार के लिए सबसे अहम नेपाल के वराह क्षेत्र में बहुद्देशीय डैम बनाने की योजना थी लेकिन इसके सर्वे का काम आज तक पूरा नहीं हुआ। राज्य में आने वाली प्रलयंकारी बाढ़ से न केवल जनजीवन अस्त व्यस्त होता है बल्कि आधारभूत संरचनाओं को भी काफी नुकसान होता है। डॉ. झा ने कहा कि यदि केन्द्र सरकार तथा बिहार सरकार बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत करना चाहती है तो बाढ़ के स्थाई समाधान की दिशा में कारगर कदम तत्काल उठाने की आवश्यकता है। अभी राज्य तथा केन्द्र में राजग गठबंधन की सरकार है। यदि राज्य तथा केन्द्र की इच्छा शक्ति होगी तो निश्चित रूप से इसका समाधान होगा। लेकिन अधिकारी नहीं चाहते हैं कि बाढ़ का स्थाई समाधान हो क्योंकि बाढ़ बड़े पैमाने पर लूट-खसोट का जरिया है। वर्तमान में बाढ़ पीड़तिों को और सहायता की आवश्यकता है। प्रो. उदय शंकर मिश्रा ने कहा कि राजनेताओं व नौकरशाह की मिलिभगत तथा लूट-खसोट के कारण आज तक बाढ़ का स्थाई समाधान नहीं हुआ है। मौके पर डॉ. सुरेश राम, डॉ. कुशेश्वर सहनी, मनोज कुमार झा, श्याम कुमार झा, गोनूक राम, परमानंद चौधरी, मुकुल महासेठ, मोदी नारायण चौधरी, अनिल कुमार झा, कुलानंद झा, रघुनाथ शर्मा, धम्रेन्द्र कुमार, जितेंद्र कुमार, अरुण कुमार, चन्द्र मोहन चौधरी, पुनिया नंद यादव, भाग नारायण चौधरी, कृष्ण कुमार झा, प्रो. उदय शंकर मिश्रा आदि थे।

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