पटना: बिहार के भोजपुर की विभा आज खुद इतनी आत्मनिर्भर हो गई है कि अब वो अपने इलाके की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रही है. भोजपुर की यह महिला घर बैठे ही आत्मनिर्भर बन रही है. विभा घर बैठकर ऑर्गेनिक साबुन बनाती है. इस रोजगार के बारें में वो आसपास का महिलाओं को भी बता रही है. जिससे वो भी आत्मनिर्भर बन सके.  

विभा महिलाओं और लड़कियों को कर रही जागरूक
बीते साल कोरोना संक्रमण के दौरान उसके प्रकोप ने साबुन और हाथों की साफ-सफाई के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है. इस में खुद को वायरस, बैक्टीरिया, अन्य जीवाणुओं और स्वस्थ रहने के लिए हाथों को अच्‍छे से धोना बेहद जरूरी हो गया था. हालांकि ज्‍यादा हाथ धोने के कारण कई लोगों की शिकायत होती है कि बार-बार हाथ धोने से स्किन ड्राई हो जाती है. लेकिन अगर आप ऑर्गेनिक साबुन का इस्‍तेमाल करते हैं, तो यह आपकी ड्राई हैंड की समस्‍या को दूर कर सकती है. 

साबुन बनाकर बनी विभा आत्मनिर्भर 
आज हम आपको कुछ ऐसे ही साबुन बना रही आत्मनिर्भर महिला विभा देवी के बारे में बता रहे है. दरअसल भोजपुर जिले के उदवंत नगर थाना अंतर्गत सरथुआ गांव में एक महिला, जो आत्मनिर्भर होकर घर में साबुन का निर्माण करती है. इतना ही नहीं बल्कि अपने गांव की कुछ महिलाओं और लड़कियों को भी इस आर्गेनिक साबुन बनाने के गुण को सीखा रही है. ताकि अन्य महिलाएं, लड़कियां किसी पर बोझ ना बनकर खुद आत्मनिर्भर बन सके. 

कई प्रकार के बनाती है ऑर्गेनिक साबुन   
विभा देवी ने बताया कि वह घर में सोप बेस की मदद से सात प्रकार के साबुन बनाती है. वह सबसे पहलसे लूफा की साबुन तैयार करती है. जिसे बनाने के लिए नेनुआ के छिलके का इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने बताया कि नेनुआ के छिलके को छोटा-छोटा काट कर साबुन के अंदर डाल दिया जाता है. इससे शरीर पर जमे मैल, गंदगी को छुड़ाने के लिए अन्य किसी चीज की आवश्यकता नहीं होती है. 

नीम और तुलसी के भी बनाती है साबुन 
जिसमें नीम और तुलसी के पत्ते को सुखाकर बनाती है. उसके बाद उपटन के साबुन बनाती है. जिसमें बेसन, हल्दी, चंदन पाउडर और मुल्तानी मिट्टी डालती है. फिर चारकोल के साबुन तैयार करती है. उन्होंने बताया कि चारकोल का साबुन चेहरे के लिए सबसे ज्यादा फायदामंद है. इसे लगाने से चेहरे पर पिंपल्स नहीं आते है. उसके बाद विभा गुलाब का साबुन बनाती है. जिसे बनाने के लिए वो गुलाब फूल का इस्तमाल करती है. इसी प्रकार एलोवेरा और संतरा के साबुन भी बनाती है.

20 मिनट में तैयार होते है साबुन
भोजपुर की महिला विभा देवी ने बताया कि उनको यह सभी प्रकार के साबुन बनाने में करीब 20 मिनट का समय लग जाता है. साबुन बनाने के दौरान विभा बेस, कलर, सुगंधी, तील तेल, जाफर का इस्तमाल करती है. सबसे पहले एक बड़े से पतीले में पानी भरती है. उसके बाद उसके अंदर एक छोटा पतीला रख देती है. उसके बाद छोटे वाले पतीले में सोप बेस का टुकड़ा काट कर डाल दिया जाता है. 

तीन महीने में सीका था साबुन बनाने का हुनर 
सरथुआ गांव निवासी रमेश प्रसाद की पत्नी विभा देवी ने बताया कि हम लोग सभी आत्मनिर्भर होकर काम कर रहे है. कुछ अलग करने के लिए घर का काम करने के बाद दो तीन घंटे साबुन बनाने में लगाते है और दिनभर में करीब 50 से 100 साबुन बना लेते है. उनके साथ गांव की लगभग 7 महिलाएं और कुछ लड़कियां इस हुनर को सीख रही है. पटना में उन्होंने तीन महीने जाकर साबुन बनाने का हुनर सीखा था. अब अपने गांव में सीखा रही है. वहीं साबुन बनाने के बाद वो जिले के हर एक कोने तक साबुन को पहुंचाना चाहती है. फिलहाल वो खुद साबुन की बिक्री कर रही है और उनके साथ उनके सहयोगी हर संभव मदद कर रहे है. वहीं रमेश प्रसाद एक निजी कंपनी (सूरत) में काम करते है. 

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