पटना. राज्य के 15 जिले बाढ़ से प्रभावित हो गये हैं. इन जिलों के 82 प्रखंडों की कुल 484 पंचायतें बाढ़ से आशिक या पूर्ण रूप से प्रभावित है. वहां की लगभग 17 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में है. आपदा प्रबंधन विभाग इन जिलों में राहत व बचाव का कार्य तेज कर दिया है. साथ ही सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर पर जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के साथ लगातार निगरानी हो रही है.

विभाग से शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार पटना के अलावा वैशाली, भोजपुर, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगड़िया, सहरसा, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मुंगेर अज्ञैर समस्तीपुर जिले बाढ़ से प्रभावित हैं. इन जिलों में बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की आठ और एसडीआरएफ की नौ टीमों को लगाया गया है.

इसके अलावा चार एनडीआरएफ की और पांच एसडीआरएफ की अन्य टीमें दूसरे बाढ़ प्रवण जिलों में पहले से तैनात हैं. इधर,राज्य की 90 मुख्य सड़कों पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है. हालांकि करीब 30 जगहों पर ही यातायात बाधित हुआ है. फिलहाल पथ निर्माण विभाग सड़कों को मोटरेबल बनाकर यातायात जारी रखने में लगा हुआ है.

नकटा दियारे का पूर्वी भाग डूबा, गंगा अपार्टमेंट में घुसा पानी

नकटा दियारा का पूर्वी भाग गंगा के पानी के कारण डूब चुका है. यहां कई लोगों की झुग्गी-झोंपड़ी बह चुकी है और जिनका पक्का मकान है, उनके घर के पहले तल्ले तक लगभग पानी चढ़ गया है. इसके कारण वे लोग छत पर दो-तीन दिन से प्लास्टिक का आश्रय बना कर रह रहे थे. लेकिन विषैले सांपों का छत पर पहुंचना शुरू हो गया और खाने की दिक्कत भी होने लगी.

जानवरों का चारा भी कम पड़ने और अंत में शुक्रवार को उनकी भी हिम्मत टूट गयी और करीब एक से डेढ़ हजार लोग नाव से दीघा घाट पर पहुंच गये. नकटा दियारा के पूर्वी भाग का यह हाल है कि अब वहां से लोग जल्द-से-जल्द दीघा स्थित जनार्दन घाट पर पहुंचना चाह रहे हैं. प्रशासन की ओर से भी दो दर्जन नावें वहां भेजी गयीं और उन्हें वहां से निकाल कर पटना लाया गया.

स्थिति यह है कि अगर जल स्तर कम नहीं हुआ, तो एक-दो दिन में पूर्वी भाग के अधिकांश लोग वहां से पटना आ जायेंगे. अगर जल स्तर बढ़ता रहा, तो फिर एक-दो दिनों में पश्चिमी भाग से भी पलायन शुरू हो जायेगा.

सब कुछ हो गया बर्बाद

गंगा के जल स्तर के काफी बढ़ जाने के कारण लोगों का सब कुछ बर्बाद हो चुका है. वे लोग नाव से अपने गाय-भैंस, कपड़े और अनाज लेकर जनार्दन घाट पर पहुंचे. नकटा दियारा के पूर्वी भाग से आये महेश प्रसाद राय ने बताया कि उनकी झोंपड़ी गंगा के पानी में बह गयी. वे किसी तरह से अपनी गाय-भैंस और अनाज को नाव पर लाद कर वहां से निकले हैं. वे इस आशा में रह रहे थे कि जल का स्तर कम हो जायेगा. लेकिन जल स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है.

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