राज्य में स्पेसियल म्यूटेशन का प्रयोग शुरू हो गया। इस प्रयोग के लिए सरकार ने शेखपुरा जिले के एक गांव को चुना है। प्रयोग सफल रहा तो जमीन में चौहद्दी का विवाद नहीं होगा। म्यूटेशन में दस्तावेज में नाम परिवर्तन के साथ खाता, खेसरा और रकबा के साथ प्लॉट का नक्शा भी रहेगा।

विभाग की ओर से आईआईटी रूड़की की टीम को उस गांव का नक्शा और जमीन के स्वामित्व का पूरा ब्योरा दिया जा रहा है। टीम को 15 दिन का समय दिया गया है। टीम उस गांव में प्रयोग कर सरकार को बताएगी कि राज्य के अन्य गांवों में इसे कैसे लागू किया जाएगा। 

दरअसल इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार आईआईटी रूड़की की मदद ले रही है। अभी दाखिल खारिज में कागज पर नए खरीददार का नाम खाता, खेसरा और रकबा ही रहता है। बदलाव यह होगा कि दस्तावेज में कागज पर नाम परिवर्तन के साथ प्लॉट का नक्शा (स्पेसियल मैप) और फोटो भी रहेगा। 

खाता, खेसरा और रकबा भी फोटो में रहेगा। इससे चौहद्दी का विवाद समाप्त होगा। दाखिल खारिज के साथ नक्शा देने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन जाएगा। शुक्रवार को पटना स्थित सर्वे कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में आईआईटी रूड़की के विशेषज्ञ ने बताया कि इस प्रक्रिया से कम मानव बल और न्यूनतम समय में दाखिल खारिज हो जाएगा। शेखपुरा जिला के घाट कुसुंबा प्रखंड के गांव में इसका प्रयोग किया जाएगा।

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