बूढी गंडक नदी के जलस्तर में कमी हुई तो अब कटाव भी तेज हो गया। दायां तटबंध के रसलपुर कटानी चौक के अलावा सूरतपुर गिरि टोल के पास कटाव की गति देख लोगों का दिल तेज धड़कने लगा है। चुकी कटानी मोड़ के पास कटाव रोकने के लिए वर्षों पूर्व बांध पर की गई बोल्डर की पीचिंग कट कर नदी समा चुकी है। यहां नदी की धारा जितवारपुर की ओर से आने पर सीधा बांध से टकराती है। नदी का जलस्तर जैसे -जैसे कम हो रहा है बांध से धंसना भी गिर रहा है। इससे आसपास के लोगों की धड़कन बढ़ी हुई है। हालांकि कटाव को रोकने के लिए मिट्टी की बोरी रखी गई है। वैसे स्थानीय लोग यहां पर बोल्डर पिचिंग की मांग करते रहे हैं। उधर, बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार बताते हैं कि जलस्तर कम होने के बाद बांध से दूर धंसना गिरने से कोई खतरा नहीं है। ऐसे स्थानों पर नजर रखी जा रही है। कटाव वाले स्थानों पर बोरी से पिचिंग करा दी जाएगी।

नदी की सीधी धारा बांध से टकराती है, हर साल बनी रहती है स्थिति गंभीर, डर के साए में रहते हैं लोग

गिरि टोल के पास समा गई 10- 12 बीघा जमीन

रसलपुर से आगे सूरतपुर वार्ड 13 के पास बूढ़ी गंडक नदी उत्तर से आकर पूरब की ओर घूमती है। इससे प्रत्येक वर्ष इस गांव में कटाव हो रहा है। नदी का जलस्तर कम होने के बाद खेतों में लगातार धंसना गिर रहा है। गिरी टोल के दो दर्जन से अधिक लोगों की करीब 10-12 बीघा जमीन कट कर नदी में समा चुकी है। कटाव नहीं रुका तो जल्द ही कुछ मकान भी नदी में समा जाय तो आश्चर्य नहीं होगा। गांव के रामबाबू गिरी ने बताया कि तीन सालों के दौरान उनकी एक बीघा जमीन कट कर नदी में समा चुकी है। इसके अलावा गांव के सुबोध गिरी, सुखदेव गिरी आदि ग्रामीणों की भी जमीन कटाव की भेंट चढ़ चुकी है।

मोरदीवा सिम्मर मोड़ के पास भी कटाव
मोरदीवा सिम्मर मोड़ के पास भी कटाव हो रहा है। स्थानीय राम विलास, सुबोध कुमार, विजय कुमार बताते हैं कि सिम्मर पेड़ के पास भी नदी का कटाव तेज हो रहा है। दिन भर में दो बार मिट्टी का चट तेज आवाज के साथ गिर कर नदी में समा जाता है।

बांध टूटने पर मोरदीवा, विशनपुर को खतरा

समय रहते कटाव को रोका नहीं जाता है या दाेबरा नदी का जलस्तर बढ़ता है। इसकी संभावना भी व्यक्त की जा रही है तो समस्तीपुर प्रखंड के मोरदीवा, केवश् निजातम, विशनपुर, छतौना, विशनपुर के अलावा उजियारपुर प्रखंड का रेबाड़ी, डढियां, भगवानपुर देसूआ आदि पंचायतों की एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित हो सकती है।

^नदी घटने के साथ हो रहे कटाव पर नजर रखी जा रही है। जहां-जहां कटाव हो रहा है उस स्थान को मिट्टी की बोरी से पिचिंग की जा रही है। धंसना गिरने से खतरे की बात नहीं।
-अरुण कुमार, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण विभाग

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