मैट्रिक की फर्जी मार्कशीट के आधार पर बहाल हुई आंगनबाड़ी सेविका को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। मामला औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के चापुक पंचायत के वार्ड नंबर-15 के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या- 254 ढोढ़ी का है। अपर समाहर्ता आशीष कुमार सिन्हा ने आंगनबाड़ी सेविका की रिवीजन अपील संख्या 58/2020 में आदेश पारित कर दिया। 

प्रियंका कुमारी बनाम संजना कुमारी में सुनवाई के बाद अपर समाहर्ता के न्यायालय ने आदेश पारित किया। रवि रंजन की पत्नी संजना कुमारी को सेविका पद से बर्खास्त कर दिया गया। जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में ग्राम सभा के अनुसार रवि रंजन की पत्नी संजना कुमारी का चयन सेविका के पद पर मैट्रिकुलेशन की मार्कशीट के आधार पर किया गया था। 

इसके बाद अभ्यर्थी प्रियंका कुमारी ने गोह की सीडीपीओ से संजना कुमारी के मार्कशीट के जाली होने की शिकायत की थी। सीडीपीओ ने संजना कुमारी के सेविका पद पर चयन को सही ठहराया था। इसके बाद प्रियंका कुमारी ने गोह सीडीपीओ के आदेश के विरुद्ध आईसीडीएस के डीपीओ कार्यालय में अपील वाद दायर किया। यहां भी डीपीओ ने संजना कुमारी के चयन को सही ठहराते हुए प्रियंका कुमारी की अपील को अस्वीकृत कर दिया। 

इसके बाद अपर समाहर्ता, औरंगाबाद के न्यायालय में प्रियंका कुमारी ने संजना कुमारी के फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर अपील दायर की। अपर समाहर्ता के न्यायालय ने संजना कुमारी के मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट की जांच बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड से कराई। बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड की रिपोर्ट में इस प्रमाण पत्र को फर्जी बताया गया। 

अपर समाहर्ता के न्यायालय ने वर्ष 2018 से अब तक सेविका के पद पर कार्य कर रही संजना कुमारी के फर्जी मैट्रिक सर्टिफिकेट को रद्द करते हुए सेविका के पद से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। उन्होंने गोह की सीडीपीओ को एफआईआर दर्ज करने और 2018 से लेकर अब तक संजना कुमारी द्वारा लिए गए कुल मानदेय को वसूल करने का आदेश दिया।

पहले भी हो सकती थी जांच, दब गया था मामला

सेविका संजना कुमारी के खिलाफ पहले भी शिकायत की हुई थी और उसकी जांच पहले भी हो सकती थी लेकिन मामले को दबा दिया गया। बताया जाता है कि बहाली के दौरान फर्जी सर्टिफिकेट लगाने की शिकायत प्रियंका कुमारी के द्वारा की गई लेकिन मामले को रफा-दफा कर दिया गया। 

आग्रह के बावजूद इस शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद भी विभिन्न स्थानों पर शिकायत हुई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। डीपीओ ने भी इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया। उनके स्तर से वाद को निस्तारित करने के बाद मामला अपर समाहर्ता के न्यायालय में आया जहां से उचित कार्रवाई हुई।

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