गौमय वस्ते लक्ष्मी वेदपुराणों में इस श्लोक की महिमा का वर्णन किया गया है। पहले समय में गाय के गोबर का फसलों, घर की सजावट और दैनिक जीवन में उपयोग होता था। जो शरीर को स्वस्थ्य बनाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण, गौ संरक्षण में भी सहायक था। लेकिन, वर्तमान में गोबर का उपयोग जीवन में और फसलों में लगभग समाप्त हो गया है। लेकिन, काशीपुर के नीरज गोबर से बने पर्यावरण अनुकूलन उत्पाद रोजगार, घरों की शोभा बढ़ाने और गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिये कर रहे हैं।

अन्य गोबर से निर्मित उत्पादों के साथ नीरज गोबर से बनी राखी भी तैयार कर रहे हैं। जिनका रक्षाबंधन पर डिमांड बढ़ी है। वह अब तक महाराष्ट्र, गुजरात, यूपी, कर्नाटक में 70 हजार से अधिक राखियां बेच चुके हैं।  यूपी के ग्राम मेवला कला जिला रामपुर निवासी नीरज चौधरी काशीपुर के आवास-विकास में आकर बसे हैं। उन्होंने करीब पांच साल पहले श्री बंशी गौ धाम के नाम से स्टार्टअप शुरू कर गोबर से आकर्षक कलाकृतियों के साथ चाबी के छल्ले, मूर्तियां, दीये, माला, दीवार की टाइल्स बनाने का काम शुरू किया।

नीरज ने बताया कि पहले वह दूध की डेयरी का प्लान कर रहे थे, एकाएक उनके मन में गोबर से उत्पाद बनाने का ख्याल आया और उन्होंने कुछ मूर्तियां बनाई जिसका अच्छा रिस्पांस मिला।  नीरज ने अपनी कारीगरी के दम पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज करा लिया। मास्टर ऑफ सोशल वर्क में डिग्री प्राप्त कर चुके नीरज ने बताया कि रक्षा बंधन में देसी गाय के गोबर से बनी राखियां तैयार कर रहे हैं। बताया कि 15 रुपये कीमत की करीब 70 हजार राखी महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, यूपी में बेच चुके हैं। स्थानीय स्कूलों में छात्राओं को निशुल्क राखी दे रहे हैं। 

चाइनीज राखियां बाजार से गायब 
इस बार बाजार में सिर्फ भारतीय राखियां बिक रहीं हैं। चाइना की बनी राखियों का क्रेज खत्म हो गया है। हैंड मेड राखियों और तागे वाली राखियों की खूब बिक्री हो रही है। दो वर्ष कोरोना से राखियों का बाजार कम हुआ था। इस बार थोक व फुटकर दुकानों में राखियों की बिक्री पहले की ही तरह हो गई है। देश-विदेश में रह रहे भाइयों के लिए बहनें राखियां खरीदकर कोरियर और पोस्ट ऑफिस के माध्यम से भेज रही हैं। थोक और फुटकर राखियों के विक्रेता सतीश गुप्ता ने बताया कि इस बार राखी की बिक्री दो वर्ष पहले की भांति हो रही है। चाइना मेड राखियां बाजार में नहीं है। कोई डिमांड भी नहीं है। हैंड मेड राखियों ने बाजार में जगह बनाई है। बाहर भेजने के लिए राखियों की बिक्री काफी बढ़ी है। राखी त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे ग्राहकों की बिक्री बढ़ रही है।  

महाराष्ट्र, कनार्टक, गुजरात, मुरादाबाद से ऑर्डर आने पर वह 70 हजार करीब गोबर से निर्मित राखियां बेच चुके हैं। वहीं स्थानीय स्कूलों में छात्राओं को निशुल्क राखियां दी जा रही है। प्रतिदन पांच से छह हजार राखियां निर्मित की जा रही हैं। 
नीरज चौधरी, श्री बंशी गो धाम, काशीपुर  

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