राष्ट्रपति चुनाव को लेकर ममता बनर्जी ने दिल्ली में आज बैठक बुलाई है। कहा जा रहा है कि इसमें उन्होंने कुल 18 दलों को न्यौता दिया है, लेकिन इसमें बीजेडी, टीआरएस और आम आदमी पार्टी जैसे दलों ने शामिल होने से ही इनकार कर दिया है। एक तरफ टीआरएस ने कांग्रेस को निमंत्रण देने पर न आने की बात कही है तो वहीं बीजेडी और आम आदमी पार्टी ने इसे राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अभी मीटिंग बुलाने को जल्दबाजी करार दिया है। इस बीजेडी का रवैया विपक्ष की चिंताओं को बढ़ाने वाला है और भाजपा को इससे बूस्ट मिल सकता है। दरअसल बीजेडी न ममता की मीटिंग में जाने से इनकार की वजह बताते हुए कहा है कि अभी इस बारे में बात करना जल्दबाजी होगा.

बीजेडी के एक बयान से बढ़ जाएगी विपक्ष की टेंशन

ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि हम राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कोई फैसला एनडीए के उम्मीदवार को देखने के बाद लेंगे। बीजेडी के सूत्रों ने एनडीए की ओर से चर्चा में चल रहे द्रौपदी मुर्मू के नाम को यदि आगे बढ़ाया जाता है तो फिर हमारे लिए उनका विरोध करना मुश्किल होगा। दरअसल द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से आती हैं और ओडिशा में ही उनका जन्म हुआ था। यही नहीं वर्ष 2000 में भाजपा और बीजेडी की गठबंधन सरकार में वह ओडिशा की मंत्री भी थीं। ऐसे में राज्य और आदिवासी नेता के नाम पर बीजेडी विरोध नहीं करना चाहेगी।

बीजेडी के समर्थन से जादुई आंकड़े के बेहद करीब होगी भाजपा

यदि बीजेडी की ओर से भाजपा के उम्मीवार को समर्थन दिया जाता है तो फिर उसके लिए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करना आसान होगा। राष्ट्रपति इलेक्शन के गणित की बात करें तो कुल मतों का मूल्य 10,79,206 है। एनडीए को इस चुनाव में जीत के लिए आधे से अधिक मत यानी 5 लाख 40 हजार मूल्य के वोट चाहिए। अकेले भाजपा के पास ही 4,59,414 मूल्य के मत हैं। इसके अलावा उसके सहयोगी दल जेडीयू के वोटों का मूल्य 22,485 है और एआईएडीएमके के वोटों की कीमत 15,816 है। इस तरह एनडीए के कुल वोटों का मूल्य 4,97,715 है। 

एनडीए के पास है सिर्फ 43 हजार मूल्य के वोटों की कमी

इस स्थिति में एनडीए के पास सिर्फ 43 हजार मूल्य के वोटों की ही कमी है। बीजेडी की बात करें तो उसके वोटों का मूल्य 31,686 है। वहीं आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के वोटों की कीमत 43,450 है। ऐसे में उसकी ओर से भी समर्थन मिलता है तो एनडीए बेहद आसानी से जीत जाएगा। विपक्ष में जिस तरह से बिखराव की स्थिति है, उससे एनडीए की जीत होना कठिन नहीं लगता है। दरअसल यह चर्चा भी चल रही है कि भाजपा आदिवासी या फिर अल्पसंख्यक समुदाय के किसी नेता को टिकट दे सकती है, जिसका विरोध करना किसी भी दल के लिए मुश्किल होगा।

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