बिहार में पंचायत सरकार के गठन की कवायद शुरू हो गई है. 11 चरणों में होने वाले इस चुनाव की अधिसूचना भी जारी हो सकी है. 24 सितंबर को पहले चरण के चुनाव का मतदान होगा. इससे पहले पंचायती राज विभाग की ओर से नए सिरे से मुखिया व सरपंच के दायित्वों का निर्धारण किया गया है.

मुखिया को जहां ग्राम सभा और पंचायतों की बैठक बुलाने का अधिकार होगा, वहीं इनके जिम्मे विकास योजनाओं के लिए मिलने वाली पंजी की निगरानी की भी जिम्मेवारी होगी. वहीं सरपंच गांवों में सड़कों के रखरखाव से लेकर सिंचाई की व्यवस्था, पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने जैसे कार्य करेंगे.

मुखिया को हर साल करनी होगी चार बैठकें

पंचायती राज विभाग के नए नियम के अनुसार मुखिया को अपने कार्य क्षेत्र में एक वर्ष में कम से कम चार बैठकें करनी होगी. बैठक के अलावा इनके पास ग्रामी पंचायतों के विकास की कार्य योजना बनाने के साथ-साथ प्रस्तावों को लागू करने की भी जवाबदेही होगी. इसके अलावा ग्राम पंचायतों के लिए तय किए गए टैक्स, चंदे और अन्य शुल्क की वसूली के इंतजाम करना भी इनके ही जिम्मे होगा.

सरपंचों को मिले तीन बड़े अधिकार

पंचायती राज व्यवस्था में सरपंचों को तीन बड़े अधिकार दिए गए हैं. ग्राम पंचायत की बैठक बुलाने और उनकी अध्यक्षता करने का अधिकार पहले से ही इन्हें मिला हुआ है. इसके अलावा ग्राम पंचायत की कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां भी इनके पास ही है. अब इनके जिम्मे जो मुख्य कार्य होंगे उनमें गांव की सड़कों की देखभाल, पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देना, सिंचाई की व्यवस्था करने के अलावा दाह संस्कार और कब्रिस्तान का रखरखाव करना भी होगा.

पंचायत समिति के जिम्‍मे होगा ये काम

पंचायत समिति को जो कार्य सौंपे गए हैं उसके अनुसार इन्हें केंद्र, राज्य और जिला परिषद द्वारा सौंपे कार्यों का निष्पादन करना भी है. इसके साथ ही पंचायत समिति का वार्षिक बजट बनाना व बजट पेश करना भी होगा. प्राकृति आपदाओं में पंचायत समिति प्रमुख को 25 हजार रुपये तक खर्च करने का भी अधिकार होगा.

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