सावन की पहली सोमवारी आज पटना के भक्तों में काफी उत्साह है। इसबार अपने नजदीकी धाम जाकर भोलेनाथ का अभिषेक करें। आइए जानते हैं अपने क्षेत्र के धाम को…

बाबा हरिहर नाथ मंदिर, सोनपुर
एक ही विग्रह में भगवान विष्णु व भोलेनाथ एक साथ विराजमान हैं। सोनपुर गंगा एवं नारायणी नदी की संगमस्थली है। कथा प्रचलित है कि इस भूमि पर भक्त की पुकार पर खुद हरि व हर पधारे। हरि यानी भगवान विष्णु और हर यानी भगवान शंकर। हरिहर क्षेत्र के नाम से दुनिया में ख्यात सोनपुर का चप्पा-चप्पा सावन में शिवमय हो जाता है। मान्यता है कि इसकी स्थापना ब्रह्मा ने शैव और वैष्णव संप्रदाय में एकता के लिए की थी। गज-ग्राह की पुराण कथा भी प्रमाण है।

उमानाथ मंदिर, बाढ़
इन्हें मनोकामनाओं का देव माना जाता है। उत्तरायण गंगा तट पर स्थित उमानाथ धाम की ख्याति दूर दूर तक है। जानकारों की राय में गंगा नदी पूरे भारत में केवल गंगोत्री बनारस, उमानाथ और सुल्तानगंज में ही उत्तरवाहिणी है। उत्तरायण गंगा तट पर होने के कारण ही इसे बिहार का काशी भी कहा जाता है। मंदिर में अन्य देवी देवताओं की प्राचीन मूर्तियां विद्यमान हैं। एक कथानुसार इसे त्रेतायुगीन मंदिर माना जाता है। भगवान रामचन्द्र जी अयोध्या से जनकपुर जाने के दौरान इस स्थल पर रूक रूद्राभिषेक किए थे। रामचरित मानस के उत्तरकांड में इसका जिक्र है।

बिटेश्वरनाथ मंदिर बिहटा
ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल इस मंदिर की स्थापना के पीछे कई किंवदंतियां हैं। बाबा बिहटेश्वरनाथ मंदिर देश के चार प्रख्यात चतुर्मुखी शिवलिंग में से एक है। मंदिर के पुजारी यमुना दास के अनुसार महाभारत काल में पांडव के अज्ञातवास के समय में महाराजा वाणभट्ट द्वारा इस शिवलिंग की स्थापना कराई गई थी। कलांतर में सोन नदी के कटाव से यह मंदिर भू-गर्भ में चला गया। पुनः इसकी स्थापना बिहटा के विष्णुपुरा गांव निवासी गरीबा राय ने स्वप्न अाने के बाद की। उन्हें स्वप्न अाया कि वर्षों पूर्व स्थापित शिवलिंग भूगर्भ में है, इसे पुनः स्थापित करें।

प्राचीन गौरीशंकर बैकुंठधाम मंदिर, बैकटपुर
खुसरूपुर के बैकटपुर में स्थित प्राचीन गौरीशंकर बैकुंठधाम मंदिर में भगवान शिव और पार्वती एक साथ शिवलिंग के रूप में विराजमान है। पूरे शिवलिंग पर छोटे-छोटे शिवलिंग बने है, जिसे रुद्र कहा जाता है। ऐसे सौ-सौ की 12 लाइन है। इस तरह एक मुख्य शिवलिंग में 1201 शिवलिंग हैं, जो अत्यंत दुर्लभ है। रामायण और महाभारत में भी इस मंदिर की चर्चा है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप अकबर के सेनापति राजा मान सिंह द्वारा दिया गया है। वर्तमान में बनारस में बाबा विश्वनाथ और देवघर में बाबा धाम के बीच यह ऐतिहासिक मंदिर है।

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