हिंदू धर्म में सावन का महीना बहुत ही खास माना जाता है। इस दौरान स्त्रियां महादेव की अराधना करने के साथ उपवास भी करती हैं। वहीं, सावन का महीना शुरू होते ही जहां लड़कियों के हाथ लाल-हरी चूड़ियां से भर जाते हैं वहीं, वो मेहंदी भी रचाती हैं। सिर्फ कुवांरी ही नहीं बल्कि शादीशुदा स्त्रियां भी हरी-लाल चूड़ियां पहनने के साथ मेहंदी लगाती हैं लेकिन क्या आप इसका कारण जानती हैं।

सावन में क्यों लगाई जाती है मेहंदी?

हिंदू धर्म में शादी-ब्याह व तीज-त्यौहार के मौके पर मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मेहंदी जितनी गहरी रचती है, उसे पति का उतना ही प्‍यार मिलता है। इसलिए लड़कियां तीज-त्‍योहार के मौके पर मेहंदी जरूर लगवाती हैं।

वैज्ञानिक भी मानते हैं बेहतर

वहीं, वैज्ञानिकों की माने तो बरसाती मौसम में इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण कई बीमारियों का खतरा रहता है। मगर, मेहंदी शरीर की गर्मी दूर करने और स्टेरस को दूर करती है। इससे इम्यूनिटी कुछ हद तक बढ़ती है, जिससे बीमारियां दूर रहती हैं।

हरी-चूड़ियां पहनने का महत्व

हरा रंग प्रकृति का माना जाता है जो जीवन में खुशियां लाता है। वहीं, लाल रंग सुहागिन औरत के जीवन में खुशियां और सौभाग्य लाता है। धार्मिक नजरिए से हरा-लाल रंग लड़कियों के लिए काफी शुभ माना जाता है। यही वजह है कि सावन में इस रंग की चूड़ियां और वस्त्र पहनने का रिवाज है, ताकि उन्हें भगवान शिव जी का आशीर्वाद मिले और जीवन में खुशहाली आए।

श्रृंगार करते वक्त महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान

1. सावन महीने में श्रृंगार करते वक्त लाल या हरी रंग की बिंदी लगाना शुभ माना जाता है लेकिन इस दौरान काली बिंदी बिल्कुल ना लगाएं।
2. महिलाएं भूलकर भी सावन में काले रंग के वस्त्र ना पहनें, खासकर सोमवार के दिन। हो सके तो इस दौरान लाल व हरे रंग के कपड़े पहने क्योंकि इसे शुभ माना जाता है।
3. महिला को सावन महीने में चटक लाल रंग का सिंदूर भरना चाहिए। मान्यता है कि इससे पति की उम्र लंबी होती है और भोलेनाथ भी प्रसन्न रहते हैं।
4. हो सके तो सावन में मांग अपने पति से भरवाएं और साथ ही सोमवार के दिन मंगलसूत्र भी उनके हाथों पहनें.

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