New Delhi : कुछ लोग अपनी असफलताओं से सीखते नहीं बल्कि उसे जीवन भर ढोते हैं। और खुद को कमजोर मानते हुये अपने सपनों को भूल जाते हैं। ऐसे लोगों के लिये प्रेरणा हैं राजेश कुमार वर्मा। राजेश बचपन में पढ़ाई में एक कमजोर छात्र थे। लेकिन उन्होंने अपनी इस कमजोरी को अपने जीवन की कमजोरी नहीं बनने दी। और खुद पर इतना काम किया कि उत्तर प्रदेश पीसीएस में साल-2020 में उनका 23वां रैंक आया।

इसलिए एक बात हमेशा याद रखना चाहिये कि आप कल क्या थे? इस पर न ध्यान देकर, आप आज क्या हैं और कल क्या होना चाहते हैं उसपर काम करना चाहिये। राजेश कुमार वर्मा इसके पर्याय हैं। उन्होंने इस बात को साबित कर दिया कि सच्ची लगन अगर आपके मन में हो तो आप जीवन में कुछ भी हासिल कर सकते हैं। आज पूरा परिवार, गांव, जवार उन पर गर्व करता है। उन्होंने खूब मेहनत कर अपने मां-पिता का मान बढ़ाया है।

आसान नहीं था पीसीएस होने तक का सफर – वर्ष 2018 की परीक्षा में राजेश इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे थे लेकिन उनका फाइनल सेलेक्शन लिस्ट में नाम नहीं आया। इतना नजदीक पहुंचने के बाद भी सफलता हाथ न लगने से उनके आत्मविश्वास में थोड़ी कमी आई जिसके कारण साल 2019 की परीक्षा में वे मेंस से ही बाहर हो गये। इन दो असफलताओं के बाद उन्होंने अपनी कमजोरियों से सीखा और उस पर काम किया। तीसरे प्रयास में वर्ष 2020 में उन्होंने बता दिया कि राजेश में जज्बा है, जीत को हासिल करने की। उनमें जुनून है सफल होने की। आखिर उन्होंने सफलता हासिल कर ली। और एसडीएम बने।


हिंदी मीडियम से पढ़े हैं राजेश – यूपीएससी हो या फिर राज्य सरकारों द्वारा आयोजित होने वाली सिविल सर्विस की परीक्षा, अधिकांश उम्मीदवारों को लगता है कि वे हिंदी मीडियम से हैं या फिर किसी और क्षेत्रीय माध्यम से हैं तो उन्हें सफलता नहीं मिलेगी। लेकिन सिविल सर्विस परीक्षा में माध्यम को नहीं चुना जाता बल्कि बेस्ट कैंडिडेट को चुना जाता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं राजेश। एसडीएम बनने वाले राजेश ने अपनी अधिकांश शिक्षा हिंदी मीडियम से पूरी की है। राजेश का मानना था कि शिक्षा का माध्यम कोई भी हो कड़ी मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

कड़ी मेहनत से हासिल की जा सकती है कि सफलता – राजेश का मानना है कि कोई भी उम्मीदवार जो पढ़ाई में एक सामान्य छात्र रहा है वह भी इस परीक्षा को पास कर सकता है। बस मेहनत और लगन होनी चाहिये। राजेश अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि अगर अच्छी समय सारणी बनाकर पढ़ाई की जाये तो सफलता जरूर मिलेगी। तीन चरणों (प्री, मेंस, इंटरव्यू) में होने वाली इस परीक्षा के लिये अलग शेड्यूल बनाकर पढ़ाई की जानी चाहिये।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here