पिछले दो दिनों से हो रही बारिश से सीमांचल में नदियां उफान पर हैं। इससे पूर्णिया, अररिया और किशनगंज के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है। इससे इन जिलों में नदियां तेजी से कटाव भी कर रही है। किशनगंज और अररिया जिले में कई एप्रोच रोड सहित पुल-पुलिया और सड़कें कटाव की जद में है। इसके अलावा नेपाल में भारी बारिश के कारण कोसी नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। इससे सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिले में भी बाढ़ की आशंका बढ़ने लगी है। 

पूर्णिया जिले में लगातार हो रही मानसूनी बारिश और नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद महानंदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बायसी अनुमंडल में डुमरिया और बनगामा समेत एक दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। वहीं अररिया जिले में सिकटी, पलासी, जोकीहाट व कुर्साकांटा प्रखंड  होकर बहने वाली नूना, बकरा, परमान, रतवा, घाघी, भलुआ, बरजान, लोहंदरा, सिंहया, लवकटरिया आदि नदियां उफना गई हैं। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। नरपतगंज प्रखंड होकर बहने वाली खरहाधार, गेरूआ, अरनाहा आदि नदी का पानी कई गांव में घुस गया है। इधर किशनगंज जिले में बुधवार को किशनगंज, दिघलबैंक, टेढ़ागाछ, कोचाधामन व ठाकुरगंज प्रखंड की लगभग एक दर्जन से अधिक पंचायतों में महानंदा, कनकई, बूढ़ी कनकई, रतुवा, मेंची, चेंगा आदि नदियों का पानी फैल गया। इससे तीन दर्जन गांवों की हजारों की आबादी बाढ़ से प्रभावित हो गयी है। 

नेपाल के पहाड़ी व मैदानी क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद एकबार फिर कोसी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई  है। बुधवार की शाम चार बजे कोसी नदी का डिस्चार्ज 1 लाख 81 हज़ार 95 क्यूसेक दर्ज किया गया । नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर कोसी बराज स्थित नदी के 56 में से 24 फाटकों को खोल दिया गया है। नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना के मद्देनजर चीफ इंजीनियर द्वारा तटबन्धों पर चौकसी तेज कर दी गयी है।  लगातार हो रही बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच कोसी नदी के नेपाल स्थित पूर्वी तटबंध के पुल्टेगौरा स्थित स्पर संख्या 11 बी, 12 और 13 पर नदी के तेज जलप्रवाह से अधिक दबाव बना हुआ है। हालांकि इस पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

खगड़िया जिले में बागमती व कोसी नदी में पिछले चार दिनों से उफान जारी है। दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। बुधवार को जिला प्रशासन की जारी रिपोर्ट के अनुसार बागमती 34 सेंटीमीटर तो कोसी 48 सेंटीमीटर अभी खतरे के निशान से नीचे है।

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