मुजफ्फरपुर;- बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की लापरवाह कार्यशैली व लेटलतीफी विद्यार्थियों के करियर पर भारी पड़ रही है। ताजा उदाहरण पीजी 2018-20 के तृतीय सेमेस्टर के परीक्षा व परिणाम से जुड़ा है। इस सत्र के तृतीय वर्ष की परिस्थिति सेमेस्टर की परीक्षा मार्च महीने में आयोजित की गई थी। सात महीने बीत गए पर अब तक छात्र-छात्राएं परीक्षा परिणाम के लिए बाट जोड़ रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि हजारों की संख्या में विद्यार्थी लगातार तीसरी बार पीएचडी ऐडमिशन टेस्ट से बाहर होने की कगार पर है। यदि सेमेस्टर समय पर होता तो विद्यार्थी 2020 में आयोजित हुई पैट का हिस्सा बन सकते थे, लेकिन उस समय तक प्रथम सेमेस्टर काफी परिणाम जारी नहीं हो सका था। विश्वविद्यालय चौथे सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित करने की तैयारी में है लेकिन तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा परिणाम का पता नहीं है। ऐसे में छात्र छात्राओं को फिर से अंडरटेकिंग देना पड़ेगा। इसका मतलब यह कि यदि चौथे सेमेस्टर की परीक्षा हुई और परिणाम जारी हो गया तो उन्हें तभी सफल समझा जाएगा जब तृतीय सेमेस्टर में वे सफल हुए होंगे। यदि तृतीय सेमेस्टर में कोई विद्यार्थी प्रमोटेड हो जाता है तो चौथे सेमेस्टर का परिणाम स्वतः रद्द हो जाएगा।

द्वितीय सेमेस्टर में पेंडिंग सुधार के लिए लगा रहे चक्कर

विश्वविद्यालय की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि तमाम पेंडिंग का सुधार कर दिया गया है, लेकिन अभी भी प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में छात्र पेंडिंग रिजल्ट सुधार कराने के लिए विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलेज में जाने पर विश्वविद्यालय जाकर सुधार कराने के लिए कहा जाता है। यहां पहुंचने पर छात्र छात्राओं को कॉलेज जाकर आवेदन देने को कहा जाता है इस चक्कर में कॉलेज से विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय से कॉलेज का चक्कर काटकर विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ संजय कुमार का कहना है कि जिन विद्यार्थियों का आवेदन कॉलेज के माध्यम से आ रहा है उसे एक से दो दिन के भीतर उनका परिणाम ठीक कर वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाता है। लगभग सभी पेंडिंग की समस्याएं अब समाप्त हो गई हैं। तृतीय सेमेस्टर का परिणाम भी शीघ्र जारी कर दिया जाएगा। 

input-jagarn

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