दरभंगा:- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में स्नातक तृतीय खंड में नामांकन के लिए विलंब शुल्क सहित आवेदन की तिथि 22 अगस्त को समाप्त हो गयी। पिछले सत्र में हुए कुल आवेदनों से इस बार काफी अधिक हो गया है।पिछले सत्र में कुल 1,50,592 छात्र-छात्राओं ने नामांकन कराया था जबकि इस बार कुल 1,93,365 छात्र-छात्राओं ने आवेदन के साथ शुल्क भी जमा कर दिया है। अंतिम तिथि 22 अगस्त तक हुए ऑनलाइन आवेदन के मुताबिक पंजीकरण कराये विद्यार्थियों की संख्या 211602 थी लेकिन शेष छात्रों ने या तो फॉर्म नहीं भरा या फिल शुल्क नहीं जमा किया।

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अब तक सबसे अधिक आवेदन इतिहास में नामांकन के लिए 45,005, भूगोल में 20338, जंतु विज्ञान में 19112 तथा हिन्दी में 19545 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार नामांकन के लिए अब तक न्यूनतम आवेदन प्राप्त करने वाले विषयों में बंगला (1), नेपाली (1), ड्रामाटिक्स (1), अरबी (4) तथा एंथ्रोपोलॉजी ( 2) शामिल हैं। इसके बाद 25 अगस्त को औपबंधिक चयन सूची का प्रकाशन होगा जबकि 27 अगस्त तक छात्र अपनी आपत्ति दर्ज करायेंगे, अगर कोई आपत्ति होगी। 30 अगस्त को पहली अंतिम चयन सूची का प्रकाशन होगा तथा आवंटित कॉलेजों के काउंटर पर 13 सितंबर तक नामांकन हो सकेंगे। वर्ग संचालन 16 सितंबर से शुरू हो जायेगा। सीटों की उपलब्धता के अनुसार दूसरी, तीसरी एवं चौथी सूची भी प्रकाशित होगी। जिस रफ्तार से आवेदन आये हैं इससे प्रतीत होता है कि इस बार रिकॉर्ड नामांकन होंगे। मालूम हो कि विश्वविद्यालय क्षेत्रान्तर्गत चार जिले दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर तथा बेगूसराय में कुल 42 अंगीभूत एवं 34 संबद्ध कॉलेज हैं जहां स्नातक विज्ञान, कला व वाणिज्य के प्रतिष्ठा सामान्य के प्रथम खंड में नामांकन होंगे। इन कॉलेजों में कला संकाय में दो लाख 14 हजार 119, विज्ञान संकाय में 42217 तथा वाणिज्य संकाय में 27893 सीट नामांकन के लिए स्वीकृत हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर सभी तीन संकायों में दो लाख 84 हजार 229 सीटें नामांकन के लिए स्वीकृत हैं। अब तक कभी सीटें भरी नहीं हैं। सीट स्वीकृत करने के समय विषयों की लोकप्रियता का ध्यान नहीं रखा गया। फलत: वाणिज्य संकाय में नामांकन के लिए सीटें कम पड़ जाती हैं जबकि कला संकाय में काफी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं। इधर विज्ञान संकाय के कई विषयों में नामांकन के लिए सीटें नहीं मिलती हैं तो कुछ विषयों में सीटें अधिक हो जाती हैं। जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से जब किसी विषय में बढ़ाने के लिए सरकार को पत्र भेजा गया तो सभी विषयों में उसी के अनुरूप सीटें बढ़ा दी गई। इससे कम लोकप्रिय विषयों में सीटें खाली रहती गई।

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