गूगल जैसी कंपनी में नौकरी आसानी से नहीं मिलती और जिन्हें मिलती है, उन्हें किस्मतवाला ही माना जाता है. गूगल में नौकरी करने वाले एक लड़के ने ऐसी हैक नौकरी छोड़ दी. क्यों? क्योंकि उसे समोसे बेचने थे! इस काम में वो इतना सफ़ल हुआ कि उसके खाने की चर्चा बॉलीवुड तक पहुंच गई. ये कहानी है मुनाफ़ कपाडिया की, जिन्होंने The Bohri Kitchen के नाम से लोगों को खाना खिलाना शुरू हुआ और धीरे-धीरे उनके फ़ैन्स में बड़े-बड़े लोगों के नाम जुड़ गए.

मुनाफ़ ने बताया कि कुछ साल पहले अपने बर्थडे पर उन्होंने कुछ दोस्तों को खाने के लिए बुलाया था और इन दोस्तों को मुनाफ़ की मां के हाथ का बना खाना इतना पसंद आया कि वो उसे भूल नहीं पाए. मुनाफ़ की मां नफ़ीसा को खाना पकाने का शौक था और यहीं से शुरुआत हुई बोहरी किचन की. मुनाफ़ दाऊदी बोहरा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने नोटिस किया कि वो जो खाना खाते हैं, वो बाज़ार में आराम से नहीं नहीं मिलता. स्मोक्ड चिकेन कीमा, नल्ली-नहारी, काजू चिकन, ये वो चीज़ें थे जिन्होंने इस खाने को बाकी से अलग किया.

दोस्तों से तारीफ़ मिलने के बाद मुनाफ़ ने अपने घर पर भी डाइनिंग एक्सपीरियंस की शुरुआत की. उन्होंने घर पर होटल सरीखा एक्सपीरियंस देने के लिए कुछ दोस्तों को कॉल और ईमेल किया. दो घंटे के अंदर ही उन्हें कई दोस्तों और जान-पहचान वालों की तरफ़ से कॉल आने लगी. ये पहला डाइनिंग एक्सपीरियंस शानदार रहा. लोगों को खाना बहुत पसंद आया और वो सभी ख़ुश हो कर गए.

मुनाफ़ इस वक़्त भी गूगल में जॉब कर रहे थे. दोस्तों से अच्छा फीडबैक मिलने के बाद मुनाफ़ ने हर हफ़्ते ऐसा ही एक डाइनिंग एक्सपीरियंस अपने घर में रखने का फ़ैसला किया. ये बाहर खाना खाने से ज़्यादा बेहतर था क्योंकि लोगों को घर के वातावरण में खाना मिल रहा था. धीरे-धीरे The Bohri Kitchen की तारीफ़ बढ़ती गई और कई पत्रकार तक उनसे बात करने के इच्छुक हुए.

उनके लिए सबसे बड़ा पल था जब बीबीसी की टीम उनके घर आ कर ये एक्सपीरियंस शूट कर के गई. 2015 तक पूरे मुंबई और आस-पास के इलाकों में मुनाफ़ के घर के खाने की चर्चा थी. इस पॉपुलैरिटी के बाद उन्होंने दो किचन बनाये, ताकि लोगों तक बढ़िया खाना पहुंचाया जा सके. मेनू में 100 चीज़ों की लिस्ट थी. रानी मुखर्जी, ह्रितिक रोशन जैसे स्टार्स भी उनके दीवाने थे.

मुनाफ़ और उनकी मां नफ़ीसा के खाने की जिस चीज़ की सबसे ज़्यादा चर्चा होती है, वो है उनकी थाली. 3.5 मीटर चौड़ी इस थाली का मकसद सभी पकवान लोगों तक पहुंचना है. इसका कांसेप्ट उनके समुदाय से ही आया, जिसकी जड़ें यमन की हैं. यमन एक रेगिस्तानी इलाका है, जहां पानी और संसाधनों की कमी के कारण लोग एक ही बड़ी थाली में खाना रखते थे और इसे बारी-बारी घुमाते थे ताकि खाने में रेत न गिरे. इसी बीच मुनाफ़ ने अपनी जॉब छोड़ दी, ताकि वो The Bohri Kitchen को पूरा समय दे सकें.

इस किचन परंपरा का उद्देश्य लोगों को आराम और प्यार से खाना खिलाना है. जो किसी भी तरह से खाना डिलीवर करवाने से या रेस्टोरेंट में आर्डर करने पर नहीं मिलता. साथ ही इस वक़्त TBK के दो डिलीवरी किचन हैं और ये एक महीने में तीन बार लोगों को डाइनिंग एक्सपीरियंस के लिए बुलाते हैं. एक व्यक्ति के लिए एक मील की कीमत 1500 से 3000 रुपयों के बीच होती है. इस थाली के 40 प्रतिशत पकवान वेजिटेरियन होते हैं. काम बढ़ने के साथ मुनाफ़ की मां नफ़ीसा की मदद के लिए कुछ कुक रखे गए हैं, जिन्हें उन्होंने ख़ुद ट्रेन किया है. TBK की चिकन बिरयानी, चिकेन कटलेट के अलावा दूधी का हलवा और खजूर की खट्टी-मीठी चटनी भी बहुत लोकप्रिय है.

कोरोना के दौरान इनके काम पर भी असर पड़ा है. मुनाफ ने कुछ समय पहले बाकी शहरों तक भी TBK का एक्सपीरियंस पहुंचाने के लिए 5 आउटलेट खोले थे, जिन्हें अब बंद करना पड़ रहा है. लेकिन, वो सब कुछ समय होने के बाद फिर से कोशिश करेंगे. लॉकडाउन में उन्हें और सोचने का समय मिला है ताकि वो अपना खाना और लोगों तक पहुचाएं. उनका मकसद हर बार वही होगा, कुछ ऐसा बनाना जो अलग हो और लोगों ने पहले एक्सपीरियंस न किया हो.

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