प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने G-7 शिखर सम्मेलन में दुनिया खासतौर पर अमीर देशों को आइना दिखाते हुए कहा कि भारत में विश्व की 17 प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन वैश्विक कार्बन इमिशन में हमारा योगदान सिर्फ 5 प्रतिशत का ही है. इसका मुख्य कारण हमारी लाइफ स्टाइल है. जबकि ऊर्जा और इसकी जरूरत सभी देशों को है, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए हुए हैं. दरअसल अगर प्रदूषण की समस्या और इसकी भयावहता को लेकर के चर्चा करें तो आशंका है कि जिस तरह से दुनिया में प्लास्टिक का प्रदूषण बढ़ रहा है; उसमें वर्ष 2050 तक समुद्र में मछलियों की तुलना में प्लास्टिक ज़्यादा होगा. हालांकि प्लास्टिक प्रदूषण का एक हिस्सा मात्र है लेकिन यह समस्या इसलिए भी विकराल हो जाती हैं क्योंकि दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी समुद्री तटवर्ती इलाक़ों में रहती है या उनके पास रहती है.

प्लास्टिक प्रदूषण में भारत का बेहद कम योगदान
भारत, दुनिया की 10 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सिंगल यूज प्लास्टिक का सबसे कम इस्तेमाल करने वाला देश है. द प्लास्टिक वेस्ट मेकर्स इंडेक्स के रिपोर्ट के मुताबिक 2019 से 2021 के बीच भारत में लोगों ने प्रति व्यक्ति सबसे कम चार किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा किया. रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया प्रति व्यक्ति सिंगल यूज प्लास्टिक के मामले में पहले नंबर पर है. वहां के लोगों ने इस दौरान प्रति व्यक्ति 59 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा किया. 53 किलोग्राम के साथ अमेरिका दूसरे स्थान पर है, जबकि तीसरे स्थान पर रहे दक्षिण कोरिया के हर व्यक्ति ने 44 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा किया. इसके बाद यूनाइटेड किंगडम का नंबर आता है जहाँ पर 44 किलोमीटर प्रति व्यक्ति सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है और फिर जापान का जहाँ पर37 किलोमीटर प्रति व्यक्ति सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है. इस रिपोर्ट में छठवां नंबर फ्रांस का है जहाँ पर 36 किलोमीटर प्रति व्यक्ति सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है. जबकि सातवें स्थान पर स्पेन जहाँ पर 34 किलोमीटर प्रति व्यक्ति सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है. आठवें स्थान पर जर्मनी जहाँ पर 22 किलोमीटर प्रति व्यक्ति सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जाता हैवहीं नववें स्थान पर चीन जहाँ पर 18 किलोमीटर प्रति व्यक्ति सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है.

प्रदूषण कम करने को लेकर के भारत में उठाए गए कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को साफ तौर पर यह संदेश दिया है कि जलवायु के प्रति हमारी जो प्रतिबद्धता है वह हमारे परफॉर्मेंस से ही स्पष्ट है. पीएम ने कहा कि हमने 40 प्रतिशत ऊर्जा कैपेसिटी का लक्ष्य 9 साल पहले ही पा लिया था. इसके साथ ही पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिग का लक्ष्य हमने समय से पांच महीने पहले ही प्राप्त कर लिया.पीएम मोदी ने ग्रुप ऑफ सेवेन को बताया कि भारत में विश्व का पहला पूरी तरह सोलर पावर संचालित एयरपोर्ट है. भारत का विशाल रेलवे सिस्टम इसी दशक में नेट जीरो के टॉरगेट को पा लेगा.

शहजाद पूनावाला का यह है मानना
बीजेपी राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का मानना है कि प्रदूषण और पर्यावरण को लेकर के पीएम नरेंद्र मोदी काफी गंभीर है. इसको लेकर के देश की जनता से लगातार अपील भी करते हैं. इसी का कारण है कि पीएम नरेंद्र मोदी की अपील पर देश में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग काफी कम हो गया है. उनका कहना है कि इसके साथ ही साथ सिंगल यूज़ प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर जूट के बने थैले, मिट्टी के बने कुल्हड़, पूर्वोत्तर राज्यों के बने सामान और बांस की बोतल का उपयोग भी काफी बढ़ गया. इस अपील के माध्यम से पीएम नरेंद्र मोदी ने प्लास्टिक जैसे कचरे के प्रयोग में कमी करवाई तो वहीं स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा दिया. शहजाद पूनावाला का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी अपने एक तीर से कई निशाने को साधते हैं.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए mithilanchalnews.com किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Input:- news18

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