बिहार के संस्कृत शिक्षकों के लिए खुशखबरी है. राज्य के प्रस्वीकृत संस्कृत विद्यालयों में जल्द ही शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मियों की नियुक्ति की जायेगी. स्कूलों में संस्कृत शिक्षकों व अन्य खाली पड़े पदों पर यह बहाली होगी. शिक्षा विभाग ने इसे लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है.

बिहार के संस्कृत विद्यालयों में बहाली का इंतजार लंबे समय से हो रहा है. यह इंतजार अब समाप्त होने वाला है. वर्षों से शिक्षकों व कर्मचारियों की बहाली नहीं होने के कारण सूबे के संस्कृत विद्यालयों के पठन-पाठन कार्य से लेकर काम-काज भी प्रभावित होता रहा है. संस्कृत विद्यालयों में शिक्षक नहीं होने का असर बच्चों के नामांकन पर भी दिखता है.

बिहार में संस्कृत विद्यालयों में इस विषय की शिक्षा दिलाने के प्रति अभिभावक इच्छुक नहीं दिखते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह स्कूल व व्यवस्थाओं की दुर्दशा ही मानी जाती है. सूबे में कुल 659 संस्कृत विद्यालय हैं. जिनमें 70 कोटि के विद्यालय अभी भी जांच के दायरे में हैं. इन विद्यालयों के अलावा अन्य स्कूलों में शिक्षकों व कर्मियों के बहाली की प्रक्रिया शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है.

हिंदुस्तान समाचार पत्र के अनुसार, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने सभी जिले में डीएम को निर्देश जारी किया है. जिसमें जिला अंतर्गत प्रस्वीकृत स्कूलों में शिक्षकों व कर्मियों के खाली पदों पर रोस्टर क्लियरेंस कर भेजने को कहा गया है. गुरुवार को बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की बैठक हुई. जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी ने इसकी जानकारी दी.

बता दें कि बिहार में संस्कृत शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जाने वाली मध्यमा परीक्षा का सत्र अब नियमित हो चुका है. आगामी मार्च महीने में मध्यमा परीक्षा 2022 का आयोजन किया जा सकता है. जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. वहीं बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड का अब अपना भवन भी तैयार किया जायेगा. इसके लिए डीपीआर तैयार करने का निर्देश शिक्षा विभाग ने दे दिया है. अब प्रदेश में संस्कृत की रौनक वापस लौटेगी.

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